कोटा स्टोन के वेस्ट से टाइल्स, ब्लाॅक इंटरलॉक तैयार, जल्द होगा एमओयू
कोटास्टोन के वेस्ट से टाइल्स, ब्लॉक, इंटरलॉक समेत कई उत्पाद बनाने में सेन्ट्रल बिल्डिंग रिसर्च एवं इंस्टीट्यूट रुड़की (सीबीआरआई)को सफलता प्राप्त हुई है। हाल ही में इंस्टीट्यूट ने हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को वहां बुलाकर उनके सामने इन उत्पादों का प्रदर्शन किया।
कोटा स्टोन स्लरी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. रजनी लखानी ने भास्कर को बताया कि फरवरी माह में जल्दी ही उनकी टीम कोटा आएगी। वह एसोसिएशन के साथ मिलकर एमओयू साइन करेगी। उन्होंने बताया कि 11 फरवरी को इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर प्रो. यादवेंद्र पांडेय की अध्यक्षता में बैठक की गई। इसमें स्लरी से होने वाली समस्याओं पर प्रतिनिधिमंडल ने चर्चा की। सलाहकार बोर्ड के चेयरमैन दिनेश भारद्वाज ने स्लरी से बनने वाले उत्पादों की तकनीकी देने की अपील करते हुए कहा कि यदि इंस्टीट्यूट उन्हें यह दे तो वे उद्योग लगाने को तैयार हैं। इस पर प्रो. पांडेय ने अपनी सहमति दे दी है।
वेस्ट से इको फ्रैंडली उत्पाद तैयार होंगे तो पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। इस मौके पर पांडेय ने भारद्धाज को स्वयं के हस्ताक्षरित स्लरी की सेम्पल टाइल भी भेंट की। एसोसिएशन के महासचिव मुकेश त्यागी ने बताया कि बैठक में यह तय हुआ है कि 26 फरवरी को सीबीआरआई की टीम कोटा आएगी। वह स्लरी के यार्डों का निरीक्षण करके उसके उत्पाद के निर्माण की संभावनाएं देखेगी। उनके साथ प्रोजेक्ट डायरेक्टर, कोटा कलेक्टर, रीको, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड एवं सीडोज के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ उपाध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन, उपाध्यक्ष अशोक तिवारी, सत्येन्द्र सिकरवार, बृजेश खंडेलवाल एवं संदीप रूंगटा भी शामिल थे। गौरतलब है कि भास्कर ने सबसे पहले इसकी जानकारीदी थी।
रिसर्चके लिए 15 लाख
राजस्थानपॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड ने कोटा स्टोन के वेस्ट से इको फ्रैंडली उत्पाद बनाने के लिए 15 लाख रुपए की सहायता सीबीआरआई को दी थी। पिछले करीब डेढ़ साल से इस पर रिसर्च चल रहा था। जिसमें सीबीआरआई को कामयाबी मिल गई है।
सीबीआरआई रुड़की में कोटा स्टोन की स्लरी से बनाई गई टाइल्स। संस्थान के डायरेक्टर पांडेय उद्यमी दिनेश भारद्वाज को देते हुए। इसके बाद अब उत्पाद बनाने पर सहमति होगी।
बिजनेस रिपोर्टर | कोटा
कोटास्टोन के वेस्ट से टाइल्स, ब्लॉक, इंटरलॉक समेत कई उत्पाद बनाने में सेन्ट्रल बिल्डिंग रिसर्च एवं इंस्टीट्यूट रुड़की (सीबीआरआई)को सफलता प्राप्त हुई है। हाल ही में इंस्टीट्यूट ने हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को वहां बुलाकर उनके सामने इन उत्पादों का प्रदर्शन किया।
कोटा स्टोन स्लरी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. रजनी लखानी ने भास्कर को बताया कि फरवरी माह में जल्दी ही उनकी टीम कोटा आएगी। वह एसोसिएशन के साथ मिलकर एमओयू साइन करेगी। उन्होंने बताया कि 11 फरवरी को इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर प्रो. यादवेंद्र पांडेय की अध्यक्षता में बैठक की गई। इसमें स्लरी से होने वाली समस्याओं पर प्रतिनिधिमंडल ने चर्चा की। सलाहकार बोर्ड के चेयरमैन दिनेश भारद्वाज ने स्लरी से बनने वाले उत्पादों की तकनीकी देने की अपील करते हुए कहा कि यदि इंस्टीट्यूट उन्हें यह दे तो वे उद्योग लगाने को तैयार हैं। इस पर प्रो. पांडेय ने अपनी सहमति दे दी है।
वेस्ट से इको फ्रैंडली उत्पाद तैयार होंगे तो पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। इस मौके पर पांडेय ने भारद्धाज को स्वयं के हस्ताक्षरित स्लरी की सेम्पल टाइल भी भेंट की। एसोसिएशन के महासचिव मुकेश त्यागी ने बताया कि बैठक में यह तय हुआ है कि 26 फरवरी को सीबीआरआई की टीम कोटा आएगी। वह स्लरी के यार्डों का निरीक्षण करके उसके उत्पाद के निर्माण की संभावनाएं देखेगी। उनके साथ प्रोजेक्ट डायरेक्टर, कोटा कलेक्टर, रीको, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड एवं सीडोज के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ उपाध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन, उपाध्यक्ष अशोक तिवारी, सत्येन्द्र सिकरवार, बृजेश खंडेलवाल एवं संदीप रूंगटा भी शामिल थे। गौरतलब है कि भास्कर ने सबसे पहले इसकी जानकारीदी थी।
रिसर्चके लिए 15 लाख
राजस्थानपॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड ने कोटा स्टोन के वेस्ट से इको फ्रैंडली उत्पाद बनाने के लिए 15 लाख रुपए की सहायता सीबीआरआई को दी थी। पिछले करीब डेढ़ साल से इस पर रिसर्च चल रहा था। जिसमें सीबीआरआई को कामयाबी मिल गई है।