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पद्‌मावती का इतिहास जान लेते भंसाली तो करोड़ों खर्च नहीं करने पड़ते : लखावत

5 वर्ष पहले
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भारतकी आदि शक्ति को समझने का काम पांडुलिपियों के माध्यम से होगा। ज्योतिष, ग्रहों पर काम करना है तो ब्रह्मगुप्त, आर्यभट्ट आदि विद्वानों को जानना होगा। ये कंप्यूटर, गुगल में नहीं मिलेंगे।

यह बात धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण राज्य मंत्री ओंकारसिंह लखावत ने सोमवार को अकलंक शोध संस्थान की ओर से अकलंक गर्ल्स पीजी कॉलेज में पांच दिवसीय पांडुलिपि वर्कशॉप और पेंटिंग्स एग्जीबिशन के शुभारंभ पर कही। उन्होंने संजय लीला भंसाली द्वारा बनाई जा रही पद्‌मावती मूवी को लेकर चल रहे विवाद के संबंध में कहा कि पद्‌मावती का इतिहास जान लेते तो भंसाली को करोड़ों रुपए खर्च नहीं करने पड़ते है। इन लोगों ने हमारी संस्कृति और इतिहास को पढ़ने का काम ही नहीं किया।

उन्होंने पांडुलिपियों के संरक्षण से लेकर अन्य जानकारियां भी शोधार्थियों को समझाई। उन्होंने मैक्समूलर सहित अन्य विदेशी विद्वानों के संबंध में कहा कि इन्होंने देश के इतिहास की जड़ों को काटने का काम किया हैं और पांडुलिपियों ने जड़ों को जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मुगलकाल में पांडुलिपियों को जलाया गया है।

अध्यक्षता करते हुए विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि हमें पांडुलिपियों का संरक्षण के साथ इसमें अनुसंधान होना चाहिए। यह पांडुलिपि संरक्षण नहीं एक विरासत का संरक्षण है। विशिष्ट अतिथि पंकज मेहता ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत जगत गुरु कहलाता था। पांडुलिपियों का ज्ञान अद्‌भुत है। पांडुलिपि मिशन नई दिल्ली की कीर्ति माथुर ने मिशन की आेर से पांडुलिपि संरक्षण के लिए हो रहे कार्य की जानकारियां दी। कार्यक्रम में डॉ. राजा बाबू, वंदना बडजात्या, अविनाश जैन, प्रिंसिपल डॉ. एचसी जैन सहित अन्य मौजूद रहे। संस्थान की डॉ. संस्कृति जैन ने संस्थान द्वारा पांडुलिपि सरंक्षण के लिए किए गए कार्यों की जानकारियां दी। यहां हुए सेशन में एक्सपर्ट कीर्ति श्रीवास्तव, अर्चना, अमित राणा ने पांडुलिपि संरक्षण की जानकारी दी। पांच दिवसीय कार्यशाला में मंगलवार को विभिन्न एक्सपर्ट द्वारा अलग-अलग सेशन में जानकारी दी जाएंगी

लखावत ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों को जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने जिलों में स्मारक और पैनोरमा बनाने की अनुमति जारी कर दी है। इनमें लोक देवता तेजाजी से लेकर वीर अमरसिंह राठौड़, लोकदेवता रामदेवजी, पाबूजी, पन्नाधाय, संत रैदास, पीपाजी सहित अन्य लोक देवता और महापुरुषों के स्मारक बनाए जाएंगे। साथ ही बारां में हाड़ौती पैनोरमा भी बनेगा।

छात्राओं ने 70 पेंटिंग्स लगाई

यहांकॉलेज कैंपस में 30 छात्राओं द्वारा बनाई 70 पेंटिंग्स की प्रकृति के बीच एग्जीबिशन लगाई गई। डॉ. मुक्ति पाराशर ने बताया कि यहां बने पेंटिंग्स में प्रकृति के विभिन्न आयामों को स्टूडेंट्स ने तूलिका के माध्यम से उकेरा है। पांच दिन तक यह एग्जीबिशन लगेंगे।

अकलंक गर्ल्स पीजी कॉलेज में सोमवार को छात्राओं ने पेंटिंग एग्जीबिशन लगाई। जिसे वहां आए लोगों ने सराहा।

अकलंक कॉलेज में कार्यक्रम को संबोधित करते ओंकारसिंह लखावत।

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