पहले थाने में पीटा, अब नाबालिग मानकर आंखों में धूल झाेंकने की फिराक में पुलिस
एकबच्ची को रात में घर उठाकर थाने ले आने और वहां उसके साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय पुलिस उल्टा बच्ची को कानूनी दांव-पेच में फंसा रही है। बुधवार को दादाबाड़ी पुलिस ने इस बात पर ही सवाल उठा दिए कि बच्ची नाबालिग है या नहीं। जबकि, अभी तक किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ प्राथमिक कार्रवाई तक नहीं की गई है।
4 दिन पुराने मामले में एसपी ने डीएसपी से लेकर जांच एएसपी को दे दी गई, लेकिन अभी प्राथमिक रिपोर्ट भी नहीं आई। खुद एसपी भी थाने गए, जांच की, लेकिन अब तक एक्शन कुछ नहीं दिखा। यहां तक कि उस महिला कांस्टेबल तक को सामने नहीं लाया गया, जिस पर रात में मारपीट करने का आरोप लगा है। बच्ची के स्वस्थ होने पर उसे वापस नारीशाला भेज दिया गया तो बुधवार को दादाबाड़ी थाने के एएसआई विजय सिंह वहां पहुंचे और बालिका की उम्र पता करने के लिए मेडिकल कराने की बात कही। जबकि, शैक्षणिक दस्तावेजों से पहले ही यह स्पष्ट हो चुका है कि वह नाबालिग है। बाल कल्याण समिति भी इस बात की तस्दीक कर चुकी है। हालांकि बाल कल्याण समिति ने मेडिकल जांच की बात को खारिज करते हुए साफ कह दिया कि पुलिस इतने दिनों से जांच करते हुए यह भी पता नहीं कर सकी कि बालिका नाबालिग है या नहीं। दस्तावेजों के आधार पर बालिका को पहले ही नाबालिग माना है, इसलिए वे बालिका का मेडिकल करवाना उचित नहीं समझते। बच्ची के मेडिकल में उसके शरीर पर दो चोटें सामने आई हैं।
^पुलिसदोषियों पर कार्रवाई करने की बजाय अब मामले को कानूनी दांवपेच में फंसाकर बच्ची को डरा रही है। जबकि दस्तावेज भी देखें तो बच्ची को देखकर कोई भी कह देगा कि वह नाबालिग है। यह तो सरासर गुंडागर्दी है।
-हरीशगुरुबक्शानी, अध्यक्ष,बाल कल्याण समिति