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तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मंच पर दिखी राजस्थानी लोक-कला संस्कृति

5 वर्ष पहले
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केसरियाबालम की धुन के साथ लोक कलाकारों का राजस्थानी परिधानों के बीच नृत्य। भवई और चरी में नृत्य की अदाकारियां और भाव-भंगिमाओं के बीच तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मंच पर झलकती राजस्थानी लोक-कला संगीत की स्वर लहरियां।

यह सब कुछ नजारा सोमवार को गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम गौरबंद के शुभारंभ का था। यहां पणिहारी लोककला मंडल के कलाकारों ने भवई, चरी, मयूर, घूमर, कालबेलिया सहित अन्य नृत्य की प्रस्तुतियों से स्टूडेंट्स को आनंदित कर दिया। शुभारंभ पर मारू थारा देश में निपजे तीन र| के बाद यहां गोरबंद-नखरालो... सागर पाणी भरबा जाऊ सा...चिरमिरा डाला चार सहित अन्य गीतों पर लोक नृत्य किया।

मुख्य अतिथि यूआईटी के पूर्व चेयरमैन रविंद्र त्यागी ने छात्र-छात्राओं द्वारा सकारात्मक कार्य करने की बात कही। अध्यक्षता करते हुए यूआईटी के पूर्व सचिव आरडी मीणा ने कहा कि छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में हर संभव तैयारी करनी चाहिए। स्टूडेंट्स आईएएस, आईपीएस, आरएएस के क्षेत्र में भी अपना परचम फहराए। विशिष्ट अतिथि पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुभाष बागड़ी सहित अन्य ने संबोधित किया। वाइस प्रिंसिपल डॉ. नीरु अग्रवाल, वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. अनिता कोठारी, डॉ. कल्पना, डॉ. कंचना सक्सेना, डॉ. लालचंद कहार, डॉ. विवेक मिश्र सहित अन्य आर्ट्स संकाय के स्टाफ मौजूद रहे। अतिथियों का छात्रसंघ अध्यक्ष सचिन चौधरी, उपाध्यक्ष अमित वर्मा, महासचिव रामरतन मीणा और संयुक्त सचिव मुकेश ने स्वागत किया।

गर्वमेंट आर्ट्स कॉलेज में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देते लोक कलाकार।

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