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दरा एनक्लोजर में पिंजरा खोलने के पौने 2 घंटे बाद नीचे उतरा टी-91. / दरा एनक्लोजर में पिंजरा खोलने के पौने 2 घंटे बाद नीचे उतरा टी-91.

Kota News - मुकंदरा पहुंचा टी-91; बेहोश करने के लिए 2 डॉट मारने पड़े, 4 घंटे में पहुंचा दरा, पिंजरा खोलने के पौने 2 घंटे बाद रिजर्व...

Bhaskar News Network

Apr 04, 2018, 05:30 AM IST
दरा एनक्लोजर में पिंजरा खोलने के पौने 2 घंटे बाद नीचे उतरा टी-91.
मुकंदरा पहुंचा टी-91; बेहोश करने के लिए 2 डॉट मारने पड़े, 4 घंटे में पहुंचा दरा, पिंजरा खोलने के पौने 2 घंटे बाद रिजर्व में गूंजी दहाड़


दरा एनक्लोजर में पिंजरा खोलने के पौने 2 घंटे बाद नीचे उतरा टी-91.

रणथंभौर से निकलकर 19 नवंबर से बूंदी के जंगलों में पहुंचा था बाघ

सिटी रिपोर्टर | कोटा

5 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार हाड़ौती के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ की दहाड़ गूंज गई। मंगलवार का दिन हाड़ौती के लिए बड़ी सौगात लेकर आया। वन विभाग ने कई दिन के प्रयास के बाद 19 नवंबर से रणथंभौर से निकलकर बूंदी की रामगढ़ सेंचुरी में घूम रहे बाघ टी-91 को मुकंदरा में शिफ्ट कर दिया है। रामगढ़ सेंचुरी के बांदरा पोल वनक्षेत्र में टी-91 बाघ को सुबह 6:12 बजे ट्रेंक्यूलाइज किया गया। बेहोश करने के लिए उसको दो डॉट मारने पड़े। हैल्थ चैकअप के बाद सुबह 8:15 बजे वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग में टाइगर को मुकंदरा रवाना किया गया। टाइगर का ब्लड सैंपल, हार्ट बीप, वजन, लंबाई ली गई। डॉ. राजीव गर्ग की हरी झंडी पर उसे वहां से रवाना किया गया। रामगढ़ सेंचुरी से मुकंदरा तक का रूट पुलिस ने पूरी तरह सील कर दिया। पूरे टाइम पुलिस एस्कॉर्ट व्हीकल व वन विभाग के अधिकारियों का काफिला उसके साथ रहा। काफिले ने रामगढ़ सेंचुरी से मुकंदरा तक 165 किलोमीटर का सफर तय किया। बाघ ने मुकंदरा में 12:08 बजे दरा रेंजर नाके पर एंट्री की। उसके बाद उसे 6 किलोमीटर अंदर घाटी माता मंदिर पहाड़ी के नीचे बनाए गए 28 हेक्टेयर के कवर्ड एनक्लोजर में पहुंचाया गया।

ब्रोकन टेल का भतीजा है : बाघ का काफिला मोतीपुरा, खटखड़, बूंदी, तालेड़ा, बल्लोप, हैंगिंग ब्रिज, कैथून, कनवास से दरा गांव पहुंचा। एनक्लोजर में पिंजरा खोलने के बाद टाइगर पौने 2 घंटे बाद करीब 2:15 बजे कैंटर से नीचे उतरा। टी-91 ब्रोकन टेल का भतीजा है। इसका पिता बहादुर और ब्रोकन टेल मछली के बेटे हैं। गौरतलब है कि ब्रोकन टेल वर्ष 2003 में सेलजर में आया था। उसी साल उसकी दरा में ट्रेन से टकराकर मौत हो गई थी। (कोटा फ्रंट पेज भी पढ़ें)

रात को ही कंफर्म हो गया था सुबह तक बाघ हो जाएगा ट्रेंक्यूलाइज

सीएमओ की मॉनिटरिंग में चली शिफ्टिंग

एनटीसीए की अस्थाई रोक ने शिफ्टिंग में खलल डाली। लेकिन, बाघ की सुरक्षा को देखते हुए तुरंत शिफ्टिंग जरूरी थी। सीएमओ की मॉनिटरिंग में पिछले एक हफ्ते से वन विभाग ने बाघ को ट्रेंक्यूलाइज करने की कार्रवाई की। रामगढ़ से मुकंदरा तक बाघ को ले जाने पर भी सीएमओ की कड़ी निगरानी रही।

बाघ से जन और जंगल दोनों को फायदा

हाड़ौती क्षेत्र के लोगों को बाघ टी-91 के मुकंदरा रिजर्व में सफलतापूर्वक ट्रांस लोकेशन पर बधाई। बाघ के आने से जन और जंगल, दोनों को फायदा होगा। इस पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी हाड़ौती की जनता की भी है।

-वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री

सोमवार रात को बांदरा पोल वनक्षेत्र में घूमते हुए टी-91 खुले स्पेस में आया। तभी यह कंफर्म हो चुका था कि बाघ को सुबह तक ट्रेंक्यूलाइज कर लिया जाएगा। सुबह 6:12 बजे एक टीम ने उसे ट्रेंक्यूलाइज किया। वह 100 मीटर तक झाड़ियों में भागा। कुछ देर बाद उसे स्ट्रेचर से खुले में लाया गया। हैल्थ चेकअप किया। डीसीएफ डॉ. टी मोहनराज ने बाघ का वजन 280 किलो बताया। जर्मनी से मंगवाया गया रेडियो कॉलर लगाया। बॉडी का तापमान व गर्मी को देखते हुए पिंजरे में बूंदी से बर्फ मंगवाकर रखा गया।


- वाईके साहू, फील्ड डायरेक्टर, रणथंभौर टाइगर रिजर्व

भास्कर इनसाइड स्टोरी

3 घंटे बाद होश में आया तो रवाना किया दरा के लिए

कोटा | टाइगर टी-91 को रामगढ़ से दरा तक पहुंचाने का काम किसी “सर्जिकल स्ट्राइक’ से कम नहीं था। सिर्फ भास्कर में पढ़िए शिफ्टिंग की इनसाइड स्टोरी रणथंभौर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ डॉक्टर राजीव गर्ग की जुबानी, जिन्होंने इस बाघ को ट्रेंक्यूलाइज किया।

5:21 बजे मारा डॉट : यह शाही मिजाज का टाइगर है। मैं इसका स्वभाव बखूबी जानता हूं। इसे अंधेरे में ही पकड़ा जा सकता है, उजाले में यह नजर आने वाला नहीं है। सुबह 5:21 बजे बांदरा पोल में पहला डॉट मारा।

8:15 बजे रामगढ़ से रवानगी : 8:15 बजे वह होश में आया तो दरा के लिए रवाना हो गए। पूरे दस्ते के साथ वहां से रवाना हुए। जंगल से निकलकर मेन रोड आने तक कैंटर की रफ्तार काफी कम रही, फिर हाइवे पर आने के बाद रफ्तार पकड़ी और चलते रहे। आगे-पीछे गाड़ियों का काफिला था।

2:15 पर दरा के एनक्लोजर में रखा पहला कदम

165 किमी सफर तय करके 12:08 बजे दरा में घाटी माता मंदिर पहाड़ी के नीचे कैंटर खड़ा कर दिया। आसपास की स्थिति देखने के बाद हम सभी गाड़ियों में बैठ गए और कैंटर में रखे पिंजरे का दरवाजा खोल दिया। लेकिन टाइगर पिंजरे से उतरा ही नहीं। हमारे पास बैठे-बैठे देखने के सिवाय कोई विकल्प नहीं था। करीब 2:15 बजे टाइगर ने जैसे ही दरा की जमीन पर पहला कदम रखा, हमारी खुशी का ठिकाना नहीं था।

6:12 बजे दूसरा डॉट मारा : जिस जगह यह था, उसके ठीक पीछे एक नाला था। डॉट लगने के बाद यदि यह नाले की तरफ चला जाता तो समस्या हो सकती थी। 6:12 बजे दोबारा नजर आया तो दूसरा डॉट दिया तब बेहोश हुआ।

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दरा एनक्लोजर में पिंजरा खोलने के पौने 2 घंटे बाद नीचे उतरा टी-91.
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