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‘जहां खड़े होते वहीं पर्यावरण की बात करते’

कोटा| पर्यावरणविद्राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित जेडीबी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. लक्ष्मीकांत दाधीच जहां...

Dainik Bhaskar

Jun 25, 2017, 05:35 AM IST
‘जहां खड़े होते वहीं पर्यावरण की बात करते’
कोटा| पर्यावरणविद्राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित जेडीबी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. लक्ष्मीकांत दाधीच जहां खड़े होते थे पर्यावरण संरक्षण प्रदूषण नियंत्रण की बात करते थे। बच्चों के बीच खुद को पाते थे, तो उनसे पर्यावरण से जुड़े सवाल करके जो विजेता होता था उसे कुछ कुछ इनाम जरूर देते थे।

दाधीच का शुक्रवार को बीमारी के चलते 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिजन उनके चाहने वाले शोक में है। वे शिक्षाविद् तो थे ही उन्हें पर्यावरण से गहरा लगाव था।

वह जल बिरादरी कोटा इकाई के अध्यक्ष भी रहे। जिला परिषद में लोकपाल रहे। हाड़ौती उत्सव आयोजन समिति, इंटेक, डब्ल्यू डब्ल्यूएफ , कोटा एनवायरमेंटल सेनिटेशन सोसायटी के पदाधिकारी भी रहे। उनके निर्देशन में 21 छात्रों ने शोध किया। दाधीच पहले दंपति है जिनकी प|ी गीता दाधीच को भी राष्ट्रपति पुरस्कार मिला है। विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार होने से वह जाते-जाते पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे गए। 27 साल साथ रहे एच यू भाटिया ने कहा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र के बड़े जानकार थे। उनके जाने से शहर को बड़ी क्षति हुई है। पूर्व आईएफएस वीके सालवान ने कहा हमेशा दाधीच ने पर्यावरण के प्रति मार्गदर्शन किया। तपेश्वर भाटी ने कहा वह ईगो सिस्टम से नहीं इको सिस्टम से चलने को कहते थे। बृजेश विजयवर्गीय ने कहा पर्यावरणविद दाधीच कहते थे स्वस्थ रहो, व्यस्त रहो मस्त रहो। पेड़ पौधों को प्रेम करो। डॉ. सुधीर ने कहा वह नेचर के प्रति गाइड का काम करते थे। हालांकि उनकी अंतिम इच्छा तो देह दान की थी लेकिन चिकित्सकों ने तकनीकी कारणों से देहदान लेने से मना कर दिया। महापौर महेश विजय, विधायक संदीप शर्मा, पीसीसी पंकज मेहता, पार्षद बृजेश शर्मा नीटू , डीसी एफ ललित सिंह राणावत, रेंजर दाताराम वर्मा, डॉ. कृष्णेंद्र सिंह, डॉ. प्रहलाद दुबे, दाधीच समाज के अध्यक्ष गोपाल शर्मा अनेक शिक्षाजगत की हस्तियां ने उनके निधन पर शोक जताया है। डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने कहा दाधीच हमेशा कहते थे, पेड़ इंसान के लिए ऑक्सीजन की फैक्ट्री जैसे है। पेड़ जब तक रहता है मनुष्यों को देता ही देता है और बदले कुछ नहीं लेता है। जब पेड़ नहीं रहेंगे और कारखानों वाहनों से वायु प्रदूषण बढ़ता रहेगा तो एक समय आएगा कि चौराहे पर खड़े यातायात पुलिसकर्मी को ही नहीं हर आम आदमी को ऑक्सीजन का मास्क लगाकर चलना होगा। वहीं, अनिल औदिच्य और पूर्व पार्षद मंजू मेहरा ने पर्यावरणविद् डॉ. एलके दाधीच के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। इधर, अदालत परिसर टंकण कर्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश गुप्ता, संयुक्त सचिव श्याम कुमार शर्मा पूर्व पार्षद रविंद्र बैरवा, गिरिजा शंकर कुलश्रेष्ठ, हेमराज वासेन , मोहम्मद शाकिर और वीरेंद्र सिंह सहित अन्य टाइपिस्टों ने डॉ. एलके दाधीच को श्रद्धांजलि अर्पित की है। वहीं, परिजनों ने बताया तीये की बैठक रविवार को शाम 5 बजे गीता भवन में आयोजित किया जाएगा।

पौधरोपण के लिए लोगों को हमेशा प्रेरित करते थे दिवंगत दाधीच।

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