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साधु-संत गाय के सामान होते है: आर्यिका विकाम्या

4 वर्ष पहले
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कोटा| संतभवन रामपुरा में आर्यिका विकाम्या माता जी ने कहा कि गाय और भैस दोनों दूधारू पशु है, किन्तु दोनों में एक बहुत बड़ा व्यवहारिक अंतर होता है कि गाय जब पानी की ओर जाती है और यदि वहां कीचड़ पाती है तो तुरन्त अपना पैर खींच लेती है। ठीक उससे विपरीत यदि भैस पानी में कीचड़ को महसूस करती है तो तुरन्त उस कीचड़ में कूद जाती है। उसी प्रकार जो मानव संसार रूपी कीचड़ की महसूस कर उससे दूर हो जाता है, वह संत बन जाता है और जो मानव उस कीचड़ को जानकर भी उसमे डुबकी लगाता है वह संसारी हो जाता है। संत सेवा ट्रस्ट के कैलाश बाजटा ने बताया कि 16 जुलाई को गीता भवन में चातुर्मास कलश स्थापना का भव्य आयोजन होगा।

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