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रेलवे पेट्रोल मैन अब जीपीएस के जरिए देंगे हर गड़बड़ी की सूचना

4 वर्ष पहले
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कोटा| रेलहादसे रोकने के लिए अब कोटा रेल मंडल में पेट्रोल मैन को जीपीएस डिवाइस (ट्रैकर) दिए जाने लगे हैं। पेट्रोल मैन रात्रि गश्त के दौरान इस डिवाइस को अपने साथ लेकर चलता है। कहीं भी ट्रैक पर दरार पाई जाती है, ट्रैक के नीचे से मिट्टी-गिट्टी खिसकती है तो डिवाइस से तुरंत सूचना स्थिति रेलवे कंट्रोल रूम को मिल जाती है। ये डिवाइस सीधे सैटेलाइट से जुड़ा है। इंडियन रेलवे के कोटा रेल मंडल में प्रायोगिक तौर पर ये सबसे पहले शुरू किया गया है। गर्मी, सर्दी बरसात में रेल हादसे की संभावना बनी रहती है। इन्हें रोकने के लिए पेट्रोल मैन को जीपीएस डिवाइस दिए गए हैं। यह डिवाइस रेलवे पेट्रोल मैन की मॉनीटरिंग करने के काम भी आता है। पेट्रोल मैन गश्त के दौरान कहां-कहां रुका इसको देखा जा सकता है। पेट्रोल मैन ने पेट्रोलिंग की या नहीं। इसका भी पता लग जाता है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कोटा रेल मंडल में 74 लोकेशन के पेट्रोल मैन को जीपीएस डिवाइस दिए गए हैं। इंडियन रेलवे में इस तरह का ये पहला प्रयोग हैं। पश्चिम मध्य रेलवे के जीएम ने इस इनोवेशन के लिए इंजीनियरिंग विभाग को अवार्ड भी दिया है।

विशेषसतर्कता : पेट्रोलिंगके साथ ही ट्रेन के इंजन में अधिकारी फुट प्लेट कर रहे हैं। ये कार्य ट्रैक की स्थिति का पता लगाने ड्राइवरों असिस्टेंट ड्राइवर की कार्यप्रणाली की मॉनीटरिंग की जाती है। बड़े रेलवे ब्रिज पर वाचमैन निगरानी के लिए लगाए गए हैं।

ऐसेकाम करता है जीपीएस डिवाइस

पेट्रोलमैन गश्त में सबसे पहले डिवाइस को ऑन करता है। पेट्रोलिंग के दौरान किसी समस्या पर डिवाइस का एसओएस बटन को दबाकर सूचना को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर इंजीनियरिंग विभाग अन्य विभाग के अधिकारियों को दिया जाता है। अधिकारी भी पेट्रोल मैन से बातचीत कर सकते हैं।

जीपीएस डिवाइस

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