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12 साल की है बालिका, स्कूल के प्रिंसिपल ने सौंपे सर्टिफाइड डॉक्यूमेंट्स

5 वर्ष पहले
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कोटा. दादाबाड़ी थाने में नाबालिग बालिका से मारपीट के मामले में 5वें दिन गुरुवार को भी पुलिस जांच पूरी नहीं हो सकी। बुधवार तक जिस पीड़ित बालिका का पुलिस मेडिकल करवाना चाहती थी, वो 12 साल की है। उसका जन्म 2003 में हुआ और वो अभी गुना, मध्यप्रदेश के एक स्कूल की स्टूडेंट है। वह 2 माह से स्कूल नहीं जा रही थी।
सभी दस्तावेज स्कूल प्रिसिंपल और परिजनों ने बाल कल्याण समिति को दिए हैं। लेबर ऑफिसर अजय व्यास ने भी उसके बयान लिए। इधर, जांच अधिकारी एएसपी मुख्यालय यादराम फासल ने भी बच्ची के बयान लिए।
कानून: दोषी को 3 साल तक की सजा का प्रावधान
सीनियर एडवोकेट विवेक नंदवाना ने बताया कि नाबालिग द्वारा चोरी की शिकायत पर पुलिस को उसे दोपहर में ही थाने लाना चाहिए था। टीम में शामिल पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में होना चाहिए। वहां से उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाता। बोर्ड द्वारा जो भी आदेश दिया जाता उसकी पालना पुलिस करती। लेकिन, पुलिसकर्मी अगर वर्दी में नाबालिग बालिका को रात में थाने लाकर मारपीट करे तो दोषियों को 3 साल की सजा अथवा 1 लाख रुपए का दंड अथवा दोनों से दंडित करने का प्रावधान है।

राजस्थान बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने बताया कि मैंने एसपी, आईजी और उच्च अधिकारियों से मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। जरूरत पड़ी तो मैं खुद टीम सहित कोटा आऊंगी। बच्ची को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा।
राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने बताया कि खुलासे के अगले दिन मैंने दो प्रतिनिधियों के माध्यम से पूरी रिपोर्ट मांगी थी। बच्ची ने अपने बयानों में भी महिला पुलिसकर्मी द्वारा थाने में पिटाई की बात कही है।


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