कोटा. तीन साल पहले जिस नेहरू गार्डन को संवारने में यूआईटी ने 2.85 करोड़ रुपए खर्च किए थे, रखरखाव के अभाव में उसकी हालत जीर्ण-शीर्ण हा़े रही है। बच्चों में गार्डन को लेकर जिन झूलों का क्रेज रहता है उन्हीं झूलों का आनंद उन्हें नहीं मिल पा रहा है। यहां लगा एक भी झूला सही नहीं है। किसी झूले में गड्ढे हो रहे हैं तो किसी में लोहे की पत्ती निकल रही है। जिनके कारण बच्चों के कपड़े फट जाते हैं अौर गंभीर चोट तक लग जाती है।
ऐसे में बच्चे अधिकारियों से सवाल कर रहे हैं कि इन झूलों पर कैसे झूले। बनाने के बाद यूआईटी ने इसकी तरफ कभी ध्यान ही नहीं दिया। उस क्षेत्र के लोग कई बार यूआईटी को इसकी शिकायत भी कर चुके हैं। उसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया, जबकि यहां अधिकतर अधिकारियों के बंगले हैं और वे भी यहां घूमने जाते हैं। पार्क के हालत ऐसे हैं और यूआईटी सचिव को इस बारे में कभी किसी ने जानकारी तक नहीं दी।
स्टेशन रोड स्थित इस नेहरू पार्क पहले नगर निगम के अधीन था। कांग्रेस शासन में 3 साल पहले इस क्षेत्र में यूआईटी द्वारा सौंदर्यीकरण के कार्य करवाए गए थे। तब यहां बाहर की तरफ बड़े-बड़े कलश लगाए गए थे और भीतर झूले, बैंच, फाउंटेन आदि लगाए गए थे। फ्रंट एलिवेशन कर लोहे की रेलिंग लगाई गई थी। गार्डन काफी अच्छा हो गया था और खेडली फाटक, स्टेशन तक के बच्चे यहां आते थे।
पहले तो कलश टूटने लगे और अब झूले खराब हो रहे हैं। यहां लगी जंपिंग डक की केवल स्प्रिंग ही रह गई डक गायब हो गई। फिसलपट्टी में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। फाइबर शीट की फिसलपट्टी बीच में से टूटने के कारण काफी खतरनाक हो चुकी है। यही हाल रोलिंग फिसलपट्टी का हो चुका है। उस पर लगा रबर भी गायब हो गया। चकरी भी टूट चुकी है।
कोई सुनवाई नहीं
इस संबंध में स्थानीय निवासी एडवोकेट मुकेश कुमावत समय-समय पर यूआईटी को आगाह कर चुके हैं। हाल ही में 8 फरवरी को फिर उन्होंने यूआईटी को पत्र लिखा जिसमें इस पार्क की दुर्दशा का उल्लेख कर स्टेशन क्षेत्र के मनोरंजक के एक मात्र साधन को सुधारने की मांग की। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ठीक करवाएं झूले
यूआईटी सचिव डॉक्टर एमएल यादव ने बताया कि इस पार्क को यूआईटी ने ही डवलप किया था और रखरखाव भी हम ही कर रहे हैं। वहां टूट-फूट की जानकारी मेरे सामने कभी नहीं आई। उसे दिखवाकर एस्टीमेट बनवा लेंगे और छुट्टियों से पहले ही बच्चों के लिए झूले ठीक करवाए जाएंगे।