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1 साल में मिली 30 करोड़ की मॉर्डन मशीनें, ऐसे फिर दौड़ सकती है आईएल

5 वर्ष पहले
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कोटा. माॅर्डनाइजेशन की दौड़ में आईएल कहीं पीछे नहीं है। इस उद्योग ने मार्केट की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को समय-समय पर अपडेट किया है। कंपनी ने उसी रफ्तार से अपनी मशीनरी को अपडेट किया, जिस तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के प्रोडक्ट्स में बदलाव हुए।
आपको यह जानकार हैरानी होगी कि घाटे में चल रहे इस उद्योग में बीते एक साल में करीब 30 करोड़ रुपए की नई अत्याधुनिक मशीनें आई हैं। एक मशीन तो पिछले माह ही आई है। कंपनी में ये मशीनें स्थापित भी की जा चुकी हैं और इनमें से ज्यादातर पर काम भी हो रहा है। मशीनों को खरीदने का मकसद यह था कि ऑर्डर समय पर पूरे हों और उत्पादन बढ़े, लेकिन डिमांड कम रहने से इनका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। इनमें ऑटोमैटिक कटर और पंचिंग मशीनें शामिल हैं जो कंप्यूटराइज्ड तरीके से पैनल तैयार करती हैं। पहले यह काम मैन्युअल होता था।
नई मशीनों पर पैनल का काम 100 फीसदी एक्यूरेसी के साथ होता है। अब सवाल यह कि जब भारत सरकार की कंपनी चलाने की मंशा ही नहीं थी तो फिर इन बेशकीमती मशीनों को क्यों खरीदा गया? इन मशीनों का उद्‌घाटन भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय के भारी उद्योग एवं टूल्स विभाग के संयुक्त सचिव विश्वजीत सहाय के हाथों 23 दिसंबर, 2014 को हुआ था।
2009 का पैकेज 2014 में मिली मशीनें
असल में ये मशीनें उस रिवाइवल पैकेज का हिस्सा है, जो सरकार ने 2009 में दिया था। इसमें सरकार ने तय किया था कि बीएचईएल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) आईएल को उक्त मशीनें देगा और आईएल इसके बदले बीएचईएल को उतनी ही लागत के पैनल बनाकर देगा। आईएल ने ये पैनल बनाकर दे दिए और इसके बाद से एक-एक कर ये सीएनसी शियरिंग मशीनें कंपनी को मिलती गईं।
मिसाल ये भी... समय से पहले पूरा किया ऑर्डर
आईएल ने उत्तर प्रदेश के एक पावर प्लांट का ऑर्डर हाल ही में पूरा किया है। बुरे दौर में भी कंपनी में यह आॅर्डर तय समय से पहले पूरा हुआ है। आईएल सूत्रों ने बताया कि इसे समय से पहले पूरा करने के लिए इसी 26 जनवरी को प्रबंधन ने कुछ कर्मचारियों को सम्मानित भी किया था। जाहिर है, कंपनी को बड़े ऑर्डर पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं है। सिर्फ एक आर्थिक पैकेज की जरूरत है, जो सरकार ही दे सकती है।
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