कोटा से रात 2 बजे बच्चे फोन करके बोलते हैं- मैं आत्महत्या कर लूंगा

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कोटा. मैं जयपुर, दिल्ली या देश-प्रदेश के किसी भी कोने में कहीं भी रहूं, मेरे कानों पर आपको यह ब्लूटूथ मिलेगा। आप पूछोगे इसकी क्या जरूरत है? भई, मेरे कानों पर यह ब्लूटूथ कोटा ने लगाया है। कोचिंग छात्र मुझे 5-7 फोन रोजाना करते हैं और बोलते हैं... आई विल डाई... आई विल सुसाइड...आई विल जंप...। मैं 3-3 घंटे तक उनकी काउंसिलिंग करती हूं और जिंदगी के मायने समझाती हूं।

यह कहना है राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी का। वे बुधवार को टैगोर हॉल में बाल संरक्षण की योजनाओं की समीक्षा कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मैंने अब तक 25 बच्चों को सुसाइड करने से रोका है। एक बच्चे से तो लगातार 37 बार बात हुई।
हाथ में रस्सी लेकर छात्र करते हैं काउंसलर्स से बात

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की ओर से चलाई जा रही हेल्पलाइन आईकॉल पर भी होश उड़ा देने वाले कॉल आते हैं। इंस्टीट्यूट की रिसर्च एसोसिएट शिवांगी गुप्ता ने बताया कि छात्रों के एक हाथ में रस्सी होती है और वह हमसे फोन करके कहते हैं आप क्या कर सकती हैं। मैं तो जीवन खत्म करने जा रहा हूं, जीने से क्या फायदा। इस समय छात्रों को बहुत ही धैर्य और प्यार से समझाया जाता है। ऐसे एक नहीं कई काल हेल्पलाइन पर आते हैं। दरअसल, बच्चाें की बात को सुनना चाहिए। बच्चे जब बहुत ज्यादा डिप्रेशन में चले जाते हैं, तब यह परिस्थितियां पैदा होती हैं। उनके माइंड सेट को बदलना मुश्किल हो जाता है। कुछ देर तक उनकी समस्याओं को ध्यान से सुननकर उसके समाधान के बारे में बताया जाता है।
सवाल का जवाब नहीं दे सके कई अधिकारी नींद निकालते रहे श्रम विभाग के अफसर
- प्रशासन: कलेक्टर रवि सुरपुर से कहा कि आपने लेटर लिखा, नियम बनाए, किताब निकाली... आप, बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन, इनका फॉलोअप नहीं हो रहा। बच्चे रोज मुझे व्हाट्सएप करते हैं.... ग्राउंड पर काम जीरो है।
- पुलिस: एसपी सवाई सिंह गोदारा से कहा कि हमने गांजा पकड़कर स्टिंग किया था। आईपीएस चूनाराम ने आज तक उसकी रिपोर्ट हमें नहीं भेजी, नशे की जड़ तक पुलिस क्यों नहीं पहुंची? कृति के सुसाइड और पुष्पेंन्द्र के केस का फॉलोअप कहां है?
- शिक्षा: आपने चाइल्ड लाइन हेल्प क्लब बनाई क्या? इस पर एडीईअो माध्यमिक नरेन्द्र गहलोत कोई जवाब नहीं दे सके। बोले- देखकर बताऊंगा।
- महिला बाल विकास: आंगनबाड़ी, पोषाहार के आंकड़े पूछे तो अधिकारी अपने बाबू से पूछने लगीं। चतुर्वेदी ने कहा कि मीटिंग में आने से पहले अपडेट होकर आओ।
- नारकोटिक्स: सुपरिटेडेंट रंजना पाठक से बोली, आपको हर बार बैठक में बुलाते हैं और कोई नहीं आता क्यों..? वो बोली- हमारे विभाग में बच्चों का कोई काम नहीं है? जिस पर चतुर्वेदी ने कहा- कोचिंग छात्रों में नशा फैल रहा है... वो मर रहे हैं... आपको यह नहीं दिखता। साल में एक दिन पंपलेट छापकर क्या साबित कर रहे हो?
तनाव कैसा-कैसा
छात्रों की चिट्ठियों से निकला दर्द: मनन पिछली बार कोटा आईं तब बच्चों ने चिट्ठियां लिखीं। मीटिंग में मनन ने कुछ चिट्ठियों की बात साझा की, उनमें ये 3 प्रमुख थीं।
चिट्ठी 1- मैम, हम अपने गांव के टॉप स्टूडेंट थे। लेकिन, यहां हमें जिस बैच में बैठाया जाता है, उसमें 2 साल पुराने स्टूडेंट भी हैं। वे सब जानते है और उनके सामने हमें डांटा जाता है। आप ही बताओ हम 2 महीनों में 2 साल का कोर्स कैसे कवर कर पाएंगे?
- चिट्ठी 2- बेस्ट फैकल्टी को देखकर इस कोचिंग में पढ़ने आया था। मैम, 4 माह बाद ही फैकल्टी चेंज हो गई। मेरी तरह बहुत से बच्चे इसलिए ही परेशान रहते हैं... हमें नई फैकल्टी पूरी तरह नहीं समझा पाती, वो फील और एजुकेशन नहीं मिल रहा।
- चिट्ठी 3-मैम, एडमिशन करने के पहले जैसी सुविधाएं देने का वादा करते हैं, वैसा कुछ नहीं होता। 90 प्रतिशत वालों का अलग बैच कर दिया, उन पर ज्यादा ध्यान देते हैं। ऐसे में हम खुद को कमजोर महसूस करते हैं।
खबरें और भी हैं...