झालावाड़. वर्ल्ड बैंक की चार सदस्यीय टीम ने मंगलवार को झालावाड़ पहुंचकर यहां पोस्ट हार्वेस्टिंग मैनेजमेंट और प्रोसेसिंग की संभावनाओं को तलाशा। टीम का मानना है कि यहां उद्यानिकी फसलों की पैदावार तो होती है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है। यदि इसको सही तरीके से प्रोसेसिंग कर बेचा जाए तो मुनाफा चार गुना बढ़ सकता है।
अभी इस बात की कमी के चलते उनको सही दाम नहीं मिल पा रहा है। इस क्षेत्र से जुड़ी सभी संभावनाओं काे देखा गया है। इसी के आधार पर रिपोर्ट राज्य सरकार को पेश करेंगे। जिस पर स्कीम तैयार हो सकेगी। इन स्कीमों के आधार पर वर्ल्ड बैंक मदद देगी।
खेत पर जाकर ली जानकारी
वर्ल्ड बैंक की चार सदस्यीय टीम ने यहां सबसे पहले धनवाड़ा स्थित ओम प्रकाश पाटीदार के खेतों में जाकर ग्रीन हाउस में उत्पादित होने वाली उद्यानिकी फसलों, संतरे के मदर प्लांट, सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादकता की जानकारी ली। पाटीदार ने बताया कि यहां उगाई गई उपज में लो पेस्टिसाइड का उपयोग किया गया है। यहां जैविक खाद का अधिक प्रयोग किया जाता है। इससे बाजार में इन फसलों के दाम अच्छे मिलते हैं।
ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग प्लांट देखा: टीम ने चंदलोई में स्वयंसेवी संस्था के ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग प्लांट की जानकारी ली। उन्होंने वहां प्लांट संचालक से जानकारी ली कि किसानों से किस रेट में संतरा खरीदा जाता है और ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग होने के बाद यह बाजार में किस रेट में बिकता है। उन्होंने इसके बाजार के बारे में भी जानकारी ली। इसके बाद सरोनियां गांव में टीम ने खेतों में जाकर उद्यानिकी फसलों को देखा। झालावाड़ के निकट देवरीघाटा में प्रगतिशील किसान अतुल झाला के फार्म हाउस पर संतरे के बगीचों का निरीक्षण किया।
टीम में ये रहे साथ: टीम में लंदन से आए हुए सदस्य बिमल जीत कार्टिन, यूएसए से आई हुईं मान्सा और कैटरिन सहित दिल्ली के रमन कुमार आहूजा साथ थे। उनके साथ यहां उद्यान अनुसंधान अधिकारी गोविंद श्रीवास्तव थे। उन्होंने संतरे की विभिन्न किस्मों के पौधों, मदर ब्लॉक में प्लांट ट्रांसप्लांट, पौधों की विकासक्रम की जानकारी ली। इस अवसर पर उद्यान विभाग के सहायक निदेशक कैलाश चंद शर्मा, कृषि अधिकारी सुभाष शर्मा सहित अन्य उपस्थित थे।
किसानों के प्रयासों पर खुश
यहां प्रगतिशील किसानों द्वारा नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन और अन्य कई प्रोजेक्टों में अनुदान लेकर शुरू की गई खेती में किसानों की मेहनत और उनके प्रयासों को देखकर वर्ल्ड बैंक की टीम के सदस्य खुश हुए। उन्होंने किसानों से खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत की। यहां धनवाड़ा में पाटीदार के खेत पर जैविक खाद से पैदा की हुई खीरा ककड़ी का स्वाद भी वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों ने चखा। इस पर उन्होंने किसान से खीरा-ककड़ी के कीमतों की जानकारी ली। किसान ने बताया कि 27 से 28 रुपए किलो। इसी तरह उन्होंने संतरे के मदर प्लांट को देखा। टीम ने मदर प्लांट को भी देखा।
पहले सड़कों में देते थे पैसा अब उद्यानिकी फसलों में देंगे
वर्ल्ड बैंक अब तक सड़कों के लिए पैसा इंवेस्ट किया करती थी। जिले में भी वर्ल्ड बैंक के सहयोग से कई सड़कें बनी हुई हैं। अब वर्ल्ड बैंक उद्यानिकी फसलों में सहायता देगी। अभी टीम के सदस्यों द्वारा यहां प्रगतिशील किसानों की फसलों का जायजा लिया जा रहा है। टीम पोस्ट हार्वेस्टिंग और प्रोसेसिंग में इंवेस्टमेंट की रिपोर्ट तैयार करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर स्कीमें तैयार होंगे और बजट जारी होगा।
रिपोर्ट के बाद बनने वाली स्कीमों के आधार पर किसान और उद्योगपति अब प्रोसेसिंग यूनिट में वर्ल्ड बैंक से मदद लेकर अपनी यूनिट स्थापित कर सकेंगे।