कोटा. जेल के लिए आवंटित बंधा धर्मपुरा की 200 बीघा जमीन जो पिछले दो साल से खाली नहीं हो पा रहा थी, उसे मात्र दो घंटे में अतिक्रमियों से खाली करवा लिया गया। सबसे बड़ी बात कि जिन 50-60 लोगों ने वहां पशुओं का बाड़ा बना रखा था, उनकी ओर से कोई खास विरोध भी नहीं हुआ।
जिन लोगों ने छिटपुट विरोध भी किया, वे एक ही बार समझाने पर मान गए। इतना बड़ा अतिक्रमण जिसे हटाने गया जाब्ता कई बार उल्टे पांव वापस आ चुका हो, उसका इतनी आसानी से हट जाना कई सवाल खड़े करता है।
अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने शनिवार को ही तैयारी कर ली थी। पुलिस बल और अफसरों को रविवार सुबह 7 बजे अनंतपुरा थाने पहुंचने के निर्देश दिए गए। इसके बाद अफसर भारी पुलिस बल और यूआईटी जाब्ते के साथ 8 बजे अनंतपुरा से धर्मपुरा गांव पहुंचे। पुलिस ने जमीन को चारों तरफ से घेर लिया। जेसीबी ने बाड़ों को तोड़ना शुरू कर दिया। करीब 10 बजे तक 5 जेसीबी मशीनों ने सारी चारदीवारी को ध्वस्त कर दिया।
उसके बाद यूआईटी सचिव मोड़ूदान देथा ने जेल अधीक्षक शंकर सिंह को जमीन का कब्जा दिया। इस दौरान कार्यवाहक एसपी मनीष अग्रवाल, एडीएम सिटी कल्पना अग्रवाल, एएसपी राजन दुष्यंत, एसडीएम राजेश जोशी और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि नयापुरा की जेल में क्षमता से दो गुना कैदी और बंदी हो चुके हैं। जिसके चलते सरकार ने नई जेल के लिए धर्मपुरा गांव में 200 बीघा जमीन आवंटित की थी।
प्रशासन बोला- समझाने पर मान गए
प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि अतिक्रमियों को समझाया गया था कि जमीन तो उन्हें छोड़नी होगी। यहां जेल स्थापित होगी, तो उनके लिए रोजगार बढ़ेंगे। उनके अधिकार वाली बाकी जमीन को नहीं लिया जा रहा है। इस पर वे मान गए थे।
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