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डाउनलोड करेंकोटा। देशभर के रेलवे स्टेशनों पर दिखने वाला हमारा कोटा स्टोन अब क्रिकेट मैदानों में भी पहुंच रहा है। देश के तीन खेल मैदानों में स्पिनर को तराशने के लिए कोटा स्टोन की खास प्रैक्टिस पिच बनाई गई है। पिच पर स्टोन लगाने के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि कोटा स्टोन इतना चिकना और हार्ड है कि इस पर स्पिन कराना काफी मुश्किल काम है। यदि स्पिनर प्रैक्टिस करते-करते इस पर गेंद टर्न कर लेगा तो वह दुनिया किसी भी पिच पर टर्न करा सकता है। चाहे वह उछाल वाली पिच हो या फिर बिल्कुल सपाट।
मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने इस इनोवेशन को अपनाते हुए कोटा स्टोन की प्रैक्टिस पिच तैयार कर ली है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के पिच क्यूरेटर तापोश चटर्जी ने भी इंदौर में ऐसी पिच को देखा है। बीसीसीआई के पूर्व चयनकर्ता व इंडियन टीम के पूर्व स्पिनर नरेंद्र हिरवानी की सलाह पर मुंबई और विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन ने ऐसी पिच तैयार कर प्रैक्टिस भी शुरू करवा दी है।
क्या खास है कोटा स्टोन में
कोटा स्टोन अन्य पत्थरों की तुलना में अधिक चमकदार व मजबूत होता है। यह स्पिनरों की गेंदों को लगातार झेलने की क्षमता रखता है। मार्बल व अन्य पत्थर अधिक देर तक क्रिकेट बॉल की स्पीड को झेल नहीं सकते। कोटा स्टोन के पिच पर फिरकी गेंदबाजों को कोई मदद नहीं मिलती। ऐसे में स्पिनरों को काफी दम लगाकर गेंद टर्न करानी पड़ती है।
॥कोटा स्टोन पर गेंद टर्न करवाना बहुत मुश्किल काम है। भारतीय स्पिनरों की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए यह सुझाव विभिन्न क्रिकेट एसोसिएशन के सामने रखा। कई राज्यों की एसोसिएशन ने अमल करना शुरू कर दिया है।
-नरेंद्र हिरवानी, बीसीसीआई के पूर्व चयनकर्ता व पूर्व भारतीय टेस्ट खिलाड़ी
॥इंदौर की सीमेंट पिच के ऊपर ही कोटा स्टोन की पट्टी तैयार की है। यह पत्थर चिकना व कठोर रहता है। इस पर गेंदबाजी कर स्पिनरों की क्वालिटी में सुधार किया जा सकता है। -शरद नायक, पिच क्यूरेटर, मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन
॥इनोवेशन अच्छा है। अन्य राज्यों से रिजल्ट अच्छे आते हैं, तो इसको राजस्थान में तैयार करने पर विचार किया जा सकता है। राजस्थान से अच्छे स्पिनर नहीं निकल रहे हैं। कोटा स्टोन पर गेंद को स्पिन करवाने वाला बॉलर एक बेहतरीन बॉलर बन सकता है।
तापोश चटर्जी, पिच क्यूरेटर, आरसीए
इंदौर के ऊषा राजे स्टेडियम में कोटा स्टोन से बनी पिच को देखते क्यूरेटर शरद नायर। फोटो: ओपी सोनी
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