कोटा. ट्रैफिक पुलिस ने बुधवार को भी बिना हेलमेट के दुपहिया चला रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पकड़ा। हालांकि ये सभी मान रहे हैं कि सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट जरूरी है। लेकिन, जो रास्ता ट्रैफिक पुलिस ने अपनाया है, उसे लेकर लोगों में भारी नाराजगी है।
जबरन गाड़ी से चाबी निकलने और अभद्रता करने जैसी कई बातों से लोगों में रोष है। उनका कहना है कि कार्रवाई के इस तरीके से बचने के लिए स्कूल-कॉलेजों के बच्चे यकायक गाड़ी घुमाते हैं, जिससे अन्य वाहन भिड़ते-भिड़ते बच रहे हैं। वहीं, पुलिस नवंबर 2011 के अपने ही विभाग के निर्णय को भूल रही है। तब तत्कालीन ट्रैफिक डीएसपी नारायण सिंह राजपुरोहित ने निर्देश दिए थे कि ट्रैफिक पुलिस हेलमेट अनिवार्य करने के लिए सख्ती बरतें, लेकिन घेराबंदी करके रोकने की बजाय नंबर नोट कर उसके घर चालान भेजें।
अदब से काटा जाए चालान
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा-177 के तहत वाहन चालक को अदब से रोकने का आदेश है। चालान काटते समय उसे अभद्रता नहीं की जा सकती। - विवेक नंदवाना, वरिष्ठ अधिवक्ता
जबरन चाबी निकालने के लिए मना किया है। वैसे चौराहे पर चालान काटने से ज्यादा असर हो रहा है, इसलिए यह अभियान वापस शुरू किया गया है। - तृप्ति विजयवर्गीय, ट्रैफिक डीएसपी
पुलिस की चिंता सुरक्षा को लेकर है तो कलेक्टर के पुराने आदेश का पालन क्यों नहीं करती।
सुरक्षा की चिंता है तो सालभर ये अभियान क्यों नहीं चलाए जाते? त्योहारों के आने के ठीक पहले ही क्यों चलाए जाते हैं?
सुरक्षा की आड़ में कहीं पुलिस ने कोई और टारगेट तो नहीं फिक्स कर रखा है?
सुसाइड के प्रयास का केस दर्ज हो
2012 में कलेक्टर जीएल गुप्ता ने आदेश दिया था कि बिना हेलमेट दुपहिया चलाने वालों पर आत्महत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज किया जाए। लेकिन, पुलिस द्वारा आज तक वाहन चालकों के खिलाफ ऐसा कोई केस दर्ज नहीं किया गया।
3 माह में 177 लाइसेंस की पंचिंग
ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करने पर यूं तो तीन बार पंचिंग करके लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है। लेकिन, 2013 में ट्रैफिक ऑफिस में एक भी लाइसेंस पंचिंग और निरस्त होने के लिए नहीं भेजा गया। तीन माह पहले लगातार सड़क दुर्घटनाओं के बाद प्रशासन ने सख्ती की तो जुलाई, अगस्त और सितंबर की 23 तारीख तक कुल 177 लाइसेंस पंचिंग करने के लिए भेजे गए।