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सरपंच के प्रयास और गांव वालों ने अपने दम पर रोशन किए चार अंधेरे रास्ते

7 वर्ष पहले
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कोटा। कोटा जिले के एक सरपंच के छोटे से प्रयास ने चार गांवों की किस्मत बदल दी है। गांव के रास्तों के अंधेरे को रोशनी में बदल दिया है। यह नई पहल जिले के लुहावद ग्राम पंचायत में हुई है। जहां इन गांवों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अंधेरे से परेशान रहते थे। कीचड़ में गिरने का अंदेशा बना रहता था। आज वहां की गलियां और चौराहे जगमग हैं।
लुहावद सरपंच रफीक पठान ने ग्रामीणों से बात कर घरों के सामने रोड लाइट लगवाईं। पंचायत सहित गणेशपुरा, गणेश खेड़ा और अमरपुरा में ग्रामीणों के सहयोग से 150 रोड लाइट लगाई जा चुकी हैं। यह परिवर्तन देख आज लोग खुश हैं। रोड लाइट बंद और चालू करने का जिम्मा भी ग्रामीणों ने लिया है। और तो और बिजली का बिल भी ग्रामीण ही चुकाते हैं। ग्राम पंचायत को ग्रामीणों ने खुद हस्ताक्षर कर स्वैच्छिक करार पत्र भी दिया है।
पहले 100 वाट का बल्ब, अब सीएफएल
पहले ग्रामीण 100 वाट का बल्ब मकान के बाहर जलाते थे। जिसे कभी बंद तो कभी चालू कर देते थे। एक बल्ब में करीब 60 रुपए महीने खर्च आता था। अब 45 वाट की सीएफएल लगी है। खर्च भी घटकर आधा रह गया और रोशनी भी ज्यादा।
अच्छा लगा सुझाव
' पंचायत सहित चार गांवों में रोड लाइट की समस्या थी। मैंने सुझाव दिया तो लोगों को अच्छा लगा। 13वें वित्त आयोग में मिलने वाली राशि से चार गांवों में व्यवस्था करवा दी। सार-संभाल के लिए एक लाइनमैन की भी व्यवस्था कर दी। जिस परिवार के सामने रोड लाइट है उसका खर्च उसके मीटर से जोड़ा है। लाइट जलाने और बंद की जिम्मेदारी भी परिवार को सौंपी है।'

-रफीक पठान, सरपंच लुहावद
' गांव में पहले अंधेरे से परेशान थे। खेतों से आते समय भी कीचड़ में गिरने की दिक्कत होती थी। अब खेतों से ही बिजली की रोशनी दिख जाती है। शहर की तरह लगने लगा है गांव।'
-कमलेश महावर, निजी स्कूल शिक्षक लुहावद
' सरपंच ने अच्छा प्रयोग किया है। लोग जिम्मेदारी समझकर ऐसी पहल करें तो गांवों में सामान्य समस्या का अपने स्तर पर ही समाधान हो सकता है। जिला परिषद इस तरह की नई पहल करने पर हर संभव सरपंचों को सपोर्ट करेगी।'
-पीसी पवन, सीईओ जिला परिषद