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बाढ़ से बचकर फंसे सरकारी लापरवाही के झमेले में, स्थानीय लोगों ने दिया आसरा

7 वर्ष पहले
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कोटा। दो सितंबर को श्रीनगर घूमने गया एक दल सोमवार रात को सुरक्षित कोटा लौट आया। परिवारजनों ने स्टेशन पर दल के सदस्यों को गले से लगा लिया। अपनों से मिलने की खुशी चेहरों पर साफ झलक रही थी। सामाजिक कार्यकर्ता उमर सीआईडी नेतृत्व में परिजन उनको रिसीव करने पहुंचे थे। हालांकि जन्नत की तबाही का मंजर अभी भी उनके जेहन से दूर नहीं हो रहा है।
दल में शामिल घंटाघर निवासी अब्दुल हमीर ने बताया कि श्रीनगर से पहले ही अनंतनाग जिले के ब्रिज बिहारा क्षेत्र में फंस गए थे। यहां पर सरकारी सहायता फंसे हुए लोगों तक नहीं पहुंच पा रही थी। ऐसे में स्थानीय लोगों ने फंसे हुए लोगों को खाने-पीने की सुविधा मुहैया करवा पाई। यहां से जम्मू का रास्ता कट जाने के कारण परेशानी बढ़ गई थी।
स्थानीय लोगों ने टैक्सी उपलब्ध करवाकर कास्तवाड़ा के जरिए जम्मू तक पहुंचाया। यह रास्ता मिलिट्री के घेरे में था। जम्मू तक पहुंचने के लिए 200 किलोमीटर का अधिक रास्ता तय करना पड़ा। ये दल चार सितंबर से 12 सितंबर तक ब्रिज बिहारा क्षेत्र में ही फंसे हुआ था। दल में चार-पांच बच्चे भी शामिल थे।
ये लोग थे फंसे

अब्दुल हामिद अंसारी, अब्दुल सलाम, नूर बानो, अब्दुल इमरान, शबनम बानो, यास्मीन उर्फ अमरीन, नरगिस बानो, सालिस, वादे शाला, अदनान, शादान, शारीन, अब्दुल शालिक, साजीन, सुमाइना नूर, अब्दुल अली।
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