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स्टेशन पर CCTV कैमरों के बाद भी घटनाओं को नहीं देख पा रही GRP

7 वर्ष पहले
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कोटा। सीसीटीवी कैमरों की मॉनीटरिंग का काम आरपीएफ, सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग के पास होने से जीआरपी को काफी परेशानी हो रही है। कोई वारदात होने पर जीआरपी को इधर-उधर मुंह ताकना पड़ रहा है। मतलब निगरानी के लिए व्यवस्था होने के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था कारगर नहीं हो पा रही है।
गौरतलब है कि प्लेटफार्म और ट्रेनों में होने वाली वारदातों को रोकने के लिए जीआरपी जिम्मेदार है। मामले में उसे ही मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को पकड़ना होता है। लेकिन,वह हमेशा उक्त दोनों विभागों से फुटेज के लिए गुजारिश करती रहती है। कुल मिलाकर जीआरपी के पास कैमरों की मॉनीटरिंग का कोई सिस्टम नहीं है, जो उसके लिए बेहद जरूरी है। यदि मॉनीटरिंग सिस्टम हो तो वह तुरंत संदिग्ध पर कार्रवाई कर सकती है।
दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर स्थित कोटा महत्वपूर्ण स्टेशनों में गिना जाता है। यहां यात्री सुरक्षा के लिए प्लेटफार्म पर लगभग 7 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इनका मॉनीटरिंग सिस्टम रेलवे पूछताछ कक्ष में (सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग) तथा आरपीएफ पोस्ट में लगा है।
आरपीएफ पोस्ट में भी रिकॉर्डिंग देखने की व्यवस्था नहीं है। जीआरपी को यदि बीते दिनों की रिकॉर्डिंग देखनी हो तो उसे सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग से संपर्क करना पड़ता है। कुछ दिनों पहले वाणिज्य विभाग की ओर से सात नए सीसीटीवी कैमरे प्लेटफाॅर्म सफाई की मॉनीटरिंग के लिए लगवाए गए। इसकी मॉनीटरिंग विभाग स्वयं कर रहा है।
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