कोटा। दोनों पति-पत्नी 12 साल से एचआईवी से संक्रमित हैं, लेकिन भाग्य को कोसने या समाज से मुंह छिपाने की बजाय उन्होंने अपने जैसों की मदद के लिए जिंदगी समर्पित कर दी। जो मासूम छोटी उम्र में ही इस संक्रमण की गिरफ्त में आ चुके हैं और देखरेख करने वाला कोई नहीं है, ऐसे बच्चों को ये दंपती पाल रहे हैं। इनके पास फिलहाल 16 बच्चे हैं। साथ ही संभाग के 950 एचआईवी संक्रमित लोगों को इलाज और दूसरों को संक्रमित किए बिना जिंदगी जीने के तरीके बता रहे हैं।
कानूनी रूप से एचआईवी पॉजीटिव व्यक्ति का नाम और उसकी पहचान गुप्त रखी जाती है, लेकिन कोटा के नयापुरा निवासी सुरेश जैन और उनकी पत्नी को इससे कोई आपत्ति नहीं है। एचआईवी की भ्रांतियों को दूर करने के लिए उन्होंने खुद के फोटो के साथ संदेश देने वाले पैम्फलेट्स प्रकाशित करवा रखे हैं। उनके फोटो और नाम का उपयोग करने के लिए वे खुद परमिशन देते हैं। जैन बताते हैं कि जब उन्हें अपने संक्रमित होने का पता चला तो हाड़ौती नेटवर्क फोर पीपुल लिविंग विद एचआईवी संस्था के जरिए लोगों को जागृत करने निकल पड़े।
बेटे ने कहा था: पापा मेरे जैसे बच्चों को यहीं ले आओ
दंपती का बेटा भी एचआईवी पॉजीटिव था। 11 साल का होने पर जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो बाहर आना-जाना बंद हो गया। बेटे ने ही कहा कि पापा आप मेरे जैसे अन्य बच्चों को भी यहीं क्यों नहीं ले आते, हम एक साथ रह लेंगे, मेरा भी मन लग जाएगा और उनका इलाज भी हो जाएगा। इस पर उन्होंने 2011 में ऐसे बच्चों को लाना शुरू कर दिया। उनके लिए संस्कार-द चाइल्ड केयर सेंटर शुरू किया। हालांकि कुछ दिन बाद बेटे की मृत्यु हो गई, लेकिन सेंटर बंद नहीं हुआ। अभी 16 में से दो को छोड़कर शेष ऐसे हैं, जिनके माता-पिता नहीं हैं। इलाज के साथ बच्चों का पास ही स्कूल में एडमिशन करवा रखा है। देखरेख के लिए दंपती के अलावा 5 जनों का स्टाफ है। खर्च के लिए जनसहयोग से इंतजाम होता है। जैन समाज के कुछ लोग जुड़े हुए हैं। डॉ. गीता बंसल इसमें काफी मदद करती हैं।