कोटा। कश्मीर में तबाही मचाने वाली बाढ़ में 7 दिन फंसे रहने के बाद कोटा के देवेश सहित एनआईटी के 5 स्टूडेंट निकले तो लगा कि नई जिंदगी मिल गई। बेटों की चिंता में राेते -रोते जिन मां-बाप की आंखों से आंसू सूख चुके, उनके चेहरे बच्चों को देखकर खिल उठे।
रविवार को लौटे छात्र देवेश
सोनी ने बताया कि कश्मीर में हालत इतनी खराब है कि लोग भूख से दम तोड़ रहे हैं। हालांकि अब इंडियन आर्मी सहित पूरे देश से आ रही सहायता ने थोड़ी राहत दी है।
सोनी ने बताया कि वहां पीने के लिए गंदा पानी था, वो भी प्यास से कम। खाने के लिए ठंडा-बासा भोजन और सर्दी से बचने के लिए कंबल भी नहीं थे।
श्रीनगर में पढ़ रहे थे
श्रीनगर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में पढ़ रहे कोटा के 5 छात्रों के 7 दिन बाढ़ के खौफ में बीते। इसके बावजूद संतुष्टि केवल इस बात की रही कि वे सुरक्षित थे। रविवार को पांचों इंजीनियरिंग छात्र देवेश सोनी, अजय राठौर, दीपक नागर, उज्जवल और विकास पहुंचे। पांचों अपने 450 से ज्यादा साथियों के साथ बाढ़ की सूचना पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कश्मीर यूनिवर्सिटी पहुंच गए थे।
महावीर नगर निवासी देवेश ने बताया कि 6 सितंबर रात 10 बजे वह कॉलेज में ही थे, तभी अचानक बाढ़ गई। कॉलेज के कॉमन रूम में सब ने एक साथ रात गुजारी। सुबह सभी को कश्मीर यू्निवर्सिटी भेज दिया गया। तीन दिन वहां गुजारने के बाद उन्हें सेना की मदद से लेह लद्दाख पहुंचाया गया। जहां से सेना के प्लेन में अमृतसर और वहां से ट्रेन से कोटा पहुंचे।
परिवार ने दो दिन बाद खाना खाया
भाई चेतन सोनी ने बताया कि कोटा पहुंचने पर देवेश जैसे ही कोटा पहुंचा, परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दो दिन से खाना नहीं खा रहे परिजनों ने भगवान का शुक्रिया अदाकर खाना खाया। कोटा पहुंचने पर सभी उसको सीने से लगाकर फफक पड़े। फ़र्स्ट ईयर के स्टूडेंट देवेश ने बताया कि वो भी वहां ज्यादातर दिनों में भूखा ही रहा था। खाने का जो सामान था, वो उसने अपने दूसरे साथियों को दे दिया।
10 रुपए का सामान 100 रुपए में: छात्रों ने बताया कि उनके
मोबाइल तो कभी के बंद हो चुके थे। लाइट नहीं होने से वो उसे चार्ज नहीं कर पाए थे। जिस जगह का एक हजार रुपए किराया लगता था, उस जगह के भी उन्हें दो से ढाई हजार रुपए देने पड़े थे। 10 रुपए के सामान के लिए भी 100 रुपए तक देने पड़े। एटीएम कार्ड जेब में थे, लेकिन एटीएम मशीनें बंद थी।