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  • In Rajiv Gandhi Nagar The Consumption Of Water 3 Times More Than 3 Colonies

हॉस्टल संचालकों की मनमाी से पानी की 3 गुना ज्यादा खपत, 3 कॉलोनियां प्यासी

7 वर्ष पहले
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कोटा। यूआईटी, जलदाय विभाग अौर हॉस्टल संचालकों की मनमानी ने शहर में पेयजल व्यवस्था बिगाड़कर रख दी है। एक तरफ तो राजीव गांधी नगर में तीन गुना तक पानी दिया जा रहा है, वहीं प्रेमनगर, गोविंद नगर और कंसुआ क्षेत्र में पानी की बूंद भी नहीं पहुंच रही।
इस हालात मेें लोगों को पानी के लिए हैंडपंपों पर दिनभर लाइन लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद राजीव गांधी नगर की पानी की जरूरत पूरी नहीं हो रही और यहां टैंकरों से पानी सप्लाई हो रही है। हालत यह है कि राजीव गांधी नगर में पानी की सप्लाई 4 लाख लीटर रोज तय की गई, जो अब तक बढ़ती हुई 10 लाख लीटर तक पहुंच गई है। इसके बाद भी हॉस्टल संचालक बूस्टर से पानी खींच रहे हैं।
सारी समस्या पैदा हुई राजीव गांधी में एक के बाद एक हॉस्टल बनने से। अब यहां हॉस्टलों का पूरा शहर बस चुका है। जबकि, सारे सरकारी रिकॉर्ड में अब भी यह केवल एक आवासीय कॉलोनी है। ऐसे में यहां पानी और बिजली की डिमांड व सप्लाई में भारी अंतर आ गया है।

ये है तकनीकी पेंच
जलदाय विभाग के महावीर नगर फीडर से रोज करीब 735 लाख लीटर पानी सप्लाई होता है। इसमें से करीब 475 लाख लीटर पानी राजीव गांधी नगर से पहले पड़ने वाली कॉलोनियों में सप्लाई हो जाता है। लेकिन, जब पानी राजीव गांधी नगर पहुंचता है तो यहां 4 लाख लीटर की बजाय 10 लाख लीटर पानी सप्लाई कर दिया जाता है। इसके बावजूद बूस्टर से 3 से 4 लाख लीटर पानी और खींच लिया जाता है।
जब गोबरिया बावड़ी का वॉल्व खोला जाता है, तब डीसीएम से आगे की कॉलोनियों में पानी सप्लाई होता है। लेकिन, राजीव गांधी नगर में ज्यादा खपत होने से आगे की कॉलोनियों में पानी प्रेशर से नहीं पहुंच पाता। प्रेम नगर, गोविंद नगर और कंसुआ में तो पानी बिल्कुल नहीं पहुंच रहा।