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डाउनलोड करेंकोटा. रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्य पकड़े गए हैं। पुलिस ने इनके पास से स्टांप सहित 50 ऐसे बेरोजगारों की सूची भी बरामद की है, जिनसे रकम वसूली गई। गिरोह के मुख्य सरगना सहित 5-7 आरोपी अभी फरार हैं। गिरोह मुख्य रूप से महाराष्ट्र के बेरोजगारों को ही निशाना बनाता था। नौकरी के नाम पर एक बेरोजगार से डेढ़ लाख रुपए वसूले जाते थे।
एएसपी विनीत बंसल के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली कि कोटा में रेलवे भर्ती में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी हो रही है। कोतवाल हरिचरण मीणा के नेतृत्व में टीम ने तलाश शुरू कर दी। रामपुरा बहुमंजिला पार्किंग के पास औरंगाबाद निवासी भूषण देशमुख (25) व फिरोजाबाद निवासी प्रशांतङ्क्षसह (25) को पकड़ा। उनके पास स्टांप, रेलवे भर्ती के 10 फॉर्म, 54 लोगों की लिस्ट, 70 हजार रुपए, रेलवे के आरक्षण टिकट सहित अन्य दस्तावेज मिले। उन्होंने बताया कि गिरोह का सरगना चंद्रशेखर है और 5-7 अन्य सदस्य हैं। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 30 जनवरी तक रिमांड पर भेज दिया। पकड़े गए दोनों आरोपियों का कहना है कि वे सालभर से गिरोह के साथ थे।
इंटरव्यू और मेडिकल का भी नाटक
सीआई हरिचरण मीणा ने बताया कि गिरोह के निशाने पर महाराष्ट्र के बेरोजगार रहते थे। इनके पास मिली सूची में 49 नाम तो नए लोगों को नौकरी दिलाने व 5 नाम पुराने लोगों के हैं। इस बार इन्होंने टीसी के 2500 पदों पर होगी भर्ती के लिए पूरी साजिश रची थी। प्रशांत सिंह व भूषण 25 दिसंबर को कोटा आए थे और लौटने के बाद फिर से 21 जनवरी से कोटा में थे। महाराष्ट्र से गिरोह के सदस्यों ने बेरोजगारों की सूची इन्हें भेजी। इनमें से कोटा पहुंचे कुछ बेरोजगारों को ले जाकर कोटा स्टेशन की तरफ रेलवे के किसी ऑफिस के बाहर ले गए। बेरोजगारों से अंगूठे लगवाकर फॉर्म ऑफिस के बाहर मिले व्यक्ति को दे दिए। इंटरव्यू के लिए भी बुलाया। उसके बाद मेडिकल के लिए अस्पताल भी लेकर गए, लेेकिन बारिश तेज होने मेडिकल कैंसिल होना बताकर उन्हें रवाना कर दिया। उनसे कह दिया कि कॉल लेटर घर पर आ जाएगा।
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