कोटा. ऑडिटोरियम के भारी-भरकम किराए के कारण यहां साल में मात्र 10 कार्यक्रम ही हो पाए। नतीजा यह रहा कि सालभर में आय से ज्यादा यहां रखरखाव पर खर्च हो गया। 23 सितंबर 2013 से अब तक ऑडिटोरियम से यूआईटी को मात्र सवा पांच लाख रुपए आय हो पाई है, जबकि रखरखाव पर 7.54 लाख रुपए खर्च हो गए। वहीं इसके निर्माण पर 14.50 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। बालाजी मार्केट स्थित ऑडिटोरियम के लिए जो शर्तें यूआईटी ने रखीं, वे लगभग सामुदायिक भवन जैसी ही हैं। इसका नतीजा ये हुआ कि रंगकर्मी तो यहां का रुख ही नहीं कर पाए। जो वाणिज्यिक संस्थाएं आईं, उन्होंने ने भी ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
ऐसे हुआ खर्च- पिछले एक साल में इस पर 7.54 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। जिसमें सफाई के लिए लगे 3 कर्मचारियों का वेतन 1 लाख 78 हजार 200 रुपए, 4 गार्ड का वेतन 4.32 लाख रुपए तथा बिजली का खर्च 1.44 लाख रुपए शामिल है। इसके अलावा मॉनिटरिंग के लिए एक जेईएन स्तर के अधिकारी को भी नियुक्त कर रखा है।
होने लगा खराब- एक साल में ही ऑडिटोरियम खराब होने लगा है। पिछले दिनों बारिश में छत टपकने लगी। जिससे मुख्य हॉल की सीलिंग खराब हो गई। पीओपी व गत्ते की सीलिंग फूल गई और गिरने लगी। कुछ जगह बड़े-बड़े धब्बे हो गए। कुर्सियों को बचाने के लिए प्लास्टिक के तिरपाल ढंक रखे हैं। अब इसकी मरम्मत की जा रही है। कंट्रोल रूम के पास की दीवार से भी सीलन के कारण कपड़ा उखड़ गया।