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डाउनलोड करेंकोटा. कोटा के एयरपोर्ट पर नाले का पानी भरा होने से मंगलवार को एयर एंबुलेंस उतारने की अनुमति ही नहीं मिली। इस वजह से जीवन-मौत के बीच जूझ रहे एक घायल को दिल्ली के मेदांता अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। एयरपोर्ट पर 1992 से नियमित विमान सेवा बंद है। 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले कोटा के लिए यह ज्वलंत समस्या है, उसके बाद भी सरकारें ध्यान नहीं दे रहीं।
सोमवार को अजमेर रोड पर देवली के पास सड़क हादसे में घायल विज्ञाननगर निवासी पुरुषोत्तम दास गुप्ता (62) के इलाज के लिए उसके परिजन मेदांता अस्पताल में 3 लाख 57 हजार रुपए भी जमा करा चुके थे। इधर, कोटा में जब एयर एंबुलेंस उतारने की अनुमति मांगी गई तो पता चला कि रनवे पर पानी भरा है। स्थानीय एयरपोर्ट कर्मचारियों ने तुरत-फुरत में पट्टी से पानी निकालने का काम शुरू किया, लेकिन इसमें भी 5 घंटे लग गए। जब पानी साफ हुआ और दिल्ली में सूचना दी गई तो वहां से जवाब मिला कि एंबुलेंस को लौटने में सूरज ढल जाएगा। ऐसे में एयर एंबुलेंस को कोटा एयरपोर्ट पर उतारने की अनुमति एक दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
वादा सब करतें हैं, एक्शन कोई नहीं लेता: कोटा एयरपोर्ट का मुद्दा जब भी उठता है राजनीतिक पार्टियों के नेता विमान सेवा शुरू कराने का वादा करते हैं, लेकिन कागजी कार्रवाई भी नहीं हो पाती। चुनाव से पहले वसुंधरा राजे ने भी विमान सेवा शुरू कराने का वादा किया था। वहीं २३ सितंबर को कोटा आए तत्कालीन मुख्यमंत्री गहलोत ने भी निर्देश दिए थे।
इस पट्टी पर कैसे उतरता विमान
जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं गुप्ता
घायल गुप्ता का जबड़ा, पसलियों, पैर तथा घुटने में चोट है। लंग्स में भी चोट लगी है। उन्हें कोटा लाकर तलवंडी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज कर रहे डॉ. मामराज ने उन्हें तुरंत दिल्ली के मेदांता अस्पताल ले जाने की सलाह दी। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
पांच घंटे तक करते रहे इंतजार
घायल गुप्ता के भाई हरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि दिल्ली से 11 बजे एयर एम्बुलेंस आने की सूचना मिली थी। रनवे पर पानी भरा होने से पहले एक बजे, फिर दो बजे और फिर चार बजे स्वीकृति देने की बात की गई। शाम चार बजे अनुमति दी, लेकिन तब मेदांता अस्पताल वालों ने असमर्थता जता दी। उन्होंने कहा कि एयर एम्बुलेंस देहरादून से कोटा पहुंचेगी, तब तक साढ़े पांच बज जाएंगे। इसके बाद अंधेरा होने से कोटा से उसे उड़ाया नहीं जा सकेगा। इसलिए अब बुधवार को ही सुबह एयर एम्बुलेंस को कोटा भेजा जाएगा।
पहले भी हो चुकी हैं दो मौतें
कोटात्न एयरपोर्ट पर एयर एम्बुलेंस नहीं आ पाने के कारण पहले भी दो मौतें हो चुकी हैं। नगर निगम के एईएन मोहन खटावलिया को केवल इसलिए दिल्ली नहीं ले जाया जा सका था कि कोटा से शाम को उजाला कम होने पर एम्बुलेंस नहीं उड़ सकती थी, जिससे उनकी यहीं मौत हो गई। इसी प्रकार तत्कालीन एडीएम पोखरमल की पत्नी को भी एयर एंबुलेंस नहीं मिल पाने के कारण दम तोडऩा पड़ा था। मंगलवार को इसके नहीं आने से गंभीर रूप से घायल को दिल्ली नहीं ले जाया जा सका।
हर माह 2 से 3 एम्बुलेंस
एयरपोर्ट अधिकारी सूरजभान मीणा की मानें तो यहां से गंभीर रोगियों को दिल्ली ले जाने के लिए हर माह दो से तीन एयर एम्बुलेंस आती हैं। यहां विमान सेवा शुरू करने की सभी तैयारियां भी हैं, लेकिन सरकार के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
एयरपोर्ट अधिकारी की जिम्मेदारी
एयरपोर्ट को पूरी तरह तैयार रखने की जिम्मेदारी एयरपोर्ट अधिकारी की है। इसमें पानी भरा है तो समय रहते उन्हें इसकी निकासी करानी चाहिए थी। -जोगाराम, कलेक्टर कोटा
जवाहरनगर के नाले से पानी एयरपोर्ट में पहुंच रहा है। हवाईपट्टी के पास नाली बनाने के लिए पिछले दिनों खुदाई कराई थी। इसमें जेसीबी के कारण एक जगह रुकावट हो गई। इस नाली में बरसात व नाले का पानी आकर हवाईपट्टी पर फैल गया। -सूरजभान मीणा, एयरपोर्ट अधिकारी
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