कोटा। कलेक्टर साहब जिला परिषद की बैठक में अहम मुद्दे आते हैं। सबको सूचना देने के बाद भी अधिकारी मीटिंग में क्यों नहीं आते। ऐसे नहीं चलेगा। टाइट करो अधिकारियों को। अब मीटिंग में विभागों के जिम्मेदार अधिकारी यदि बिना सूचना के गायब रहते हैं तो रजिस्टर में नोट डालो और राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजो। यही नहीं जो अधिकारी तैयारी से नहीं आते हैं और ठीक प्रकार से जवाब नहीं देते हैं, उन्हें भी बैठक में बैठाए रखने की बजाय तत्काल रिलीव कर दें। जिला परिषद की रविवार को हुई इस कार्यकाल की अंतिम बैठक में जब कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा तो सांसद ओम बिरला ने ये बात कहीं। बैठक में विधायक हीरालाल नागर व चंद्रकांता मेघवाल भी उपस्थित थे। पिछली बैठक के एजेंडे पर बात हुई तो बैठक में आए अधिकतर विभागों के अधिकारियों के पास अधिकांश सवालों के जवाब ही नहीं थे।
कार्रवाई न होने पर मामले पेंडिंग रखो
स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, जलदाय विभाग और पुलिस के अधिकारी संबंधित सवालों के बारे में ठीक प्रकार से जवाब नहीं दे पाए तो दोनों विधायकों ने भी नाराजगी जताई। विधायक नागर ने सीईओ कल्पना अग्रवाल से कहा कि मैडम जिन बिंदुओं पर कोई कार्रवाई ही नहीं हुई उन्हें अनुमोदित करने से क्या फायदा, उन्हें पेंडिंग रखो।