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फ्लाई ऐश से बना दी डिस्प्रिन, 50 पैसे की डिस्प्रिन 25 पैसे में मिलेगी

7 वर्ष पहले
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कोटा. फ्लाई ऐश बेकार नहीं है। कोटा यूनिवर्सिटी की रसायनविद् डॉ. आशुरानी और रिसर्च स्कॉलर चित्रलेखा खत्री ने उसे उपयोगी बना दिया है। फ्लाई ऐश (थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख) से एस्प्रिन और डिस्प्रिन की गोलियां बनाने का तरीका खोजा है। उन्हें इसका पेटेंट भी मिल गया है। उनका दावा है कि इस तरीके से 50 पैसे की डिस्प्रिन 25 पैसे में मिलने लगेगी। कैटलिस्ट के तौर पर फ्लाई ऐश का पहला पेटेंट कोटा से हुआ है।

यह कोटा यूनिवर्सिटी के किसी भी विभाग का पहला पेटेंट है। डॉ. आशुरानी ने बताया कि कोटा यूनिवर्सिटी की लैब में हम पिछले चार साल से इस पर काम कर रहे थे। भारत सरकार ने इस शोध के लिए फ्लाई ऐश मिशन के तहत 70 लाख रुपए की फंडिंग की। उन्होंने बताया कि कैटलिस्ट लिक्विड फॉर्म में होता है।

रिएक्शन के बाद डिस्प्रीन अलग करने में पानी ज्यादा लगता है। इससे जल प्रदूषण भी होता है। वहीं, फ्लाई ऐश सॉलिड फॉर्म में कैटलिस्ट की भूमिका निभाता है। इससे डिस्प्रीन बनाने में पानी की जरूरत कम हो जाती है। रिएक्शन के बाद डिस्प्रीन अलग करने के लिए बार-बार पानी की जरूरत नहीं होती।


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फोटो- डॉ. आशुरानी