कोटा. पर्यटन को बढ़ावा देने और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए खोल रखे विभागों को पर्यटन स्थलों की ही सुध नहीं है। शनिवार को विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया। देश-दुनिया के पर्यटन स्थलों पर जबरदस्त रौनक रही, लेकिन कोटा का ऐतिहासिक पर्यटन स्थल अबली मीणी महल के ताले तक नहीं खुले।
राजस्थान के पर्यटकों का दल जब वहां पहुंचा तो बड़ा सा ताला लटका मिला। पर्यटकों व ट्रेवल्स कंपनी के लोगों ने वहां काफी देर तक रूककर आसपास गार्ड को तलाश लेकिन कोई नहीं मिला। काफी पूछताछ के बाद एक ही जवाब मिला कि ये तो काफी समय से बंद ही है। यही नहीं जिस विभाग आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के अधीन ये धरोहर है उसके स्थानीय अधिकारी सुरेश कुमावत तक का
मोबाइल फोन बंद था।
आगे की स्लाइड में देखें संग्रहालय में जानकारी बढ़ाते दल को।
कोटा की ट्रेवल्स कंपनी के संचालक भानू प्रताप सिंह विश्व पर्यटन दिवस पर जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा सहित राजस्थान भर के टूरिस्ट का एक दल लेकर दरा गए थे। वहां पर सबसे पहले उन्हें अबली मीणी के महल को देखना था और फिर वहां से मुकंदरा हिल्स आदि स्थानों पर जाना था।
जैसे ही वे वहां पहुंचे तो मुख्य द्वार पर ही ताला लटका हुआ मिला। ताला देख उन्होंने गार्ड को तलाश किया, लेकिन दूर-दूर तक गार्ड का पता नहीं था। मुकंदरा हिल्स से जुड़े चंद्रशेखर दुबे तो कहा। उन्होंने भी फोन पर प्रयास किए, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। काफी देर तक बंद दरवाजे के को निहारने के बाद मायूस होकर उन्होंने आगे के कार्यक्रम भी रद्द कर दिए लौट आए। कोटा के आसपास भी घूमने की बजाय वे सीधे उदयपुर के लिए रवाना हो गए।
जयपुर में शुल्क नहीं
एक तरफ कोटा के पुरा स्मारक के ताले तक नहीं खुले और दूसरी तरफ जयपुर में विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य में पुरा स्मारक की विजिट निशुल्क रखी गई थी।
हिमाचल इसलिए आगे
ट्रेवल्स संचालक भानुप्रताप का कहना है कि उनके टूर सालभर देश-विदेश में जाते हैं। भारत में ही जब हिमाचल प्रदेश के लिए टूर भेजना होता है तो वे कभी भी उनके साथ नहीं जाते। बल्कि यहीं से वहां के एजेंट को ब्रीफ कर देते हैं। उसके बाद कभी भी पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं आई।
वहां पर टूरिज्म के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक तथा गाइड से लेकर ट्रेवल्स तक के लोग हर कदम पर मदद करते हैं। यहां तक कि लेने आने से लेकर छोड़ने तक पूरी व्यवस्था करते हैं।
कोटा में नहीं हुआ कोई बड़ा आयोजन
विश्व पर्यटन दिवस पर इस बार भी कोटा में फीका ही रहा। इस अवसर पर कोई बड़ा आयोजन शहर में नहीं हुआ। हालांकि सरकारी संग्रहालय विजिट करने के लिए करीब दो हजार लोग पहुंचे। पर्यटन दिवस पर सरकारी म्यूजियम देशी, विदेशी और स्थानीय लोगों के लिए निःशुल्क था।
पर्यटन विभाग की ओर से कोटा आने वाले पर्यटकों का स्वागत तो किया गया, लेकिन शहर में किसी भी संस्था की ओर से कोई बड़ा आयोजन नहीं किया गया। उधर, कोटा यूनिवर्सिटी के हैरिटेज विभाग की ओर से स्टूडेंट्स को झालावाड़ विजिट करवाई गई।
कोर्स कार्डिनेटर डॉ. सुषमा आहूजा ने बताया कि झालावाड़ का गागरोन फोर्ट, शिव मंदिर, गवर्नमेंट म्यूजियम के साथ झालरापाटन में सूर्य मंदिर को देखकर शिल्प कला और मूर्ति कला के बारे में जाना।
स्टूडेंट्स ने बताया कि सूर्य मंदिर सुंदर पर्यटन स्थल है, पर आसपास गंदगी के कारण दिक्कत होती है। इसी प्रकार गागरोन फोर्ट में दिशा सूचक नहीं लगे होने के कारण पर्यटकों को पता नहीं चल पाता है कि जाना किधर है।