कोटा। बिना जानकारी के ही दिए गए आदेश को आखिरकार जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी को पांच घंटे में ही बदलना पड़ा। उन्होंने मिनी अकेलगढ़ को जलदाय विभाग के अधिकार में लेने और लोगों को कनेक्शन जारी करने का आदेश संभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिए थे। यहां तक कह दिया कि जयपुर स्तर के अधिकारी कोटा में है, आज ही बैठक करो और निर्णय लो। इससे अधिकारी भी सकते में आ गए और किसी तरह वस्तुस्थिति मंत्री तक पहुंचाई। हकीकत जानते ही मंत्री बैकफुट पर आ गईं और कहा कि इस मामले में एक माह में जयपुर में तीन विभाग के प्रमुख शासन सचिवों की बैठक में फैसला होगा।
यूआईटी ने कांग्रेस शासन में सकतपुरा में 130 एमएलडी का मिनी अकेलगढ़ का निर्माण 160 करोड़ खर्च करके किया। इसे 23 अक्टूबर 13 को चालू किया गया। घोषणा हुई थी कि इससे कोटा उत्तर के सभी क्षेत्रों और कैथून को पूरे प्रेशर से पानी मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज भी 44 कालोनियां और 27 गांव इससे नहीं जुड़ पाए। कनेक्शन तो दूर यहां पाइप लाइन तक नहीं बिछी। अब यूआईटी योजना को जलदाय विभाग को देना चाहता है, लेकिन अधूरी योजना को जलदाय विभाग लेना नहीं चाहता।
काम ही पूरा नहीं हुआ है
मंत्री ने प्रमुख शासन सचिव अोपी सैनी से कहा कि आज ही यहां जयपुर स्तर की बैठक कर याेजना को जलदाय विभाग के अधिकार में ले लो। शाम को कलेक्टर व जलदाय विभाग के साथ बैठक में सैनी को काम पूरा नहीं होने की बात पता चली। योजना का वर्क कंपलीट का सर्टिफिकेट भी जारी नहीं हुआ है। यह रिपोर्ट मिलते ही मंत्री ने एक माह में जयपुर में बैठक कर फैसला करने का निर्णय लिया।