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नहीं है खाद की कमी, डिमांड से ज्यादा दिया, स्टोरेज कर रहे कुछ व्यक्ति

7 वर्ष पहले
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कोटा। संभाग में यूरिया खाद की कोई कमी नहीं है। अभी तक डिमांड से ज्यादा दिया जा चुका है। इस महीने की 31 दिसम्बर तक की डिमांड 1.30 लाख मीट्रिक टन की थी, उसके मुकाबले में मंगलवार तक 1.11 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा दिया जा चुका है। खाद का कृत्रिम अभाव बता कर कुछ व्यक्ति खाद का स्टोरेज कर रहे हैं। इस कारण जरूरतमंदों को खाद नहीं मिल पाती है। इस मनोवृत्ति पर रोक लगाने के लिए एक बार में पांच कट्टे से ज्यादा देने पर रोक लगाई है। किसान बाद में भी लेगा तो उसे मना नहीं है।

यह कहना है सीएडी के परियोजना निदेशक सतीश शर्मा का। उन्होंने बताया कि इस समय कोटा जिले में 32 हजार 167, बूंदी जिले में 24 हजार 561, बारां में 34 हजार 33 और झालावाड़ जिले में 21 हजार 146 मीट्रिक टन खाद की सप्लाई दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि कृभको की एक रैक बारां मे लग चुकी है। दूसरी रैक 3200 मीट्रिक टन की आरसीएफ की बुधवार सुबह तक कोटा आने वाली है। इसलिए यूरिया की कोई कमी नहीं है। किसान इसके पहले डीएपी खाद भी डाल चुके हैं।
उत्पादन तो बहुत है, डिमांड के अनुसार है सप्लाई

सीएफसीएल में 5 हजार मीट्रिक टन यूरिया का रोजाना उत्पादन होता है। सालाना औसतन 18 लाख टन यूरिया उत्पादन होता है। परन्तु इस कंपनी को सिर्फ कोटा में ही नहीं पूरे देश में सप्लाई देनी होती है। वहीं श्रीराम फर्टिलाइजर्स में भी काफी तादाद में यूरिया बनता है। कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से डिमांड दी जाती है, उसी के अनुरूप वह आपूर्ति करते हैं। सीएफसीएल में 5 हजार मीट्रिक टन यूरिया का रोजाना उत्पादन होता है। सालाना औसतन 18 लाख टन यूरिया उत्पादन होता है। परन्तु इस कंपनी को सिर्फ कोटा में ही नहीं पूरे देश में सप्लाई देनी होती है। वहीं श्रीराम फर्टिलाइजर्स में भी काफी तादाद में यूरिया बनता है।

कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से डिमांड दी जाती है, उसी के अनुरूप वह आपूर्ति करते हैं।
कितना लगता है यूरिया

कृषि अधिकारियों के मुताबिक प्रति बीघा 18 से 20 किलो यूरिया डाला जाता है। लेकिन, कुछ किसान इससे ज्यादा मात्रा में यूरिया डालते हैं। इससे जमीन की उर्वरकता कम होती है। यूरिया से पहले किसान डीएपी भी डालते हैं। इसमें नाइट्रोजन होता है। जो यूरिया में भी मिलता है। जिसने डीएपी डाला है, उसे यूरिया भी कम डालना पड़ता है।
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