कोटा. बरड़ क्षेत्र में ऐरू नदी से सटी पहाड़ियों में सीता माता का पालना चट्टान में प्रागैतिहासिक काल की रॉक पेंटिंग्स मिलीं हैं। घनेे जंगल वाले इस क्षेत्र में उत्तर पाषाण कालीन प्रस्तर उपकरण भी भारी मात्रा में हैं। इससे पता चलता है कि यहां पर प्रागैतिहासिक काल में मानव रहा करते होंगे। घनघोर जंगल होने के कारण इस क्षेत्र में लोगों का आना-जाना नहीं होने से अभी ये रॉक पेंटिंग्स ज्यादा खराब नहीं हुई हैं। जिले में मिली कई रॉक पेंटिंग्स को लोगों ने खराब कर दिया है।
इन रॉक पेंटिंग्स की खोज करने वाले पुरा अन्वेषक ओमप्रकाश कुक्की ने बताया कि ऐरू नदी से सटी पहाड़ियों में मिली ये रॉक पेंटिंग्स अभी सुरक्षित अर्थात अच्छी हालत में है। कारण, वहां घना जंगल होने और वन्यजीवों के विचरण करने से मानवीय हलचल कम रहती है। इन रॉक पेंटिंग्स के मिलने से इस बात को बल मिलता है कि हजारों साल पहले से ही बूंदी जिला प्राचीन सभ्यता से जुड़ा है। कुक्की ने अब तक जिले सहित आसपास रॉक पेंटिंग्स की 95 साइट्स की खोज कर ली है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
छज्जेदार चट्टान में अनेक तरह के चित्र
जिस विशालकाय छज्जेदार चट्टान में ये रॉक पेंटिंग्स मिली है उसे यहां रहने वाले लोग सीता माता का पालना वाली चट्टान कहते हैं। यहां पर अनेक चित्र हैं, जिनमें शेर, शेरनी, हिरण, बारहसिंगा, मानव कृतियां, तीरकमानधारी मानव, फरसे का चित्र, वन्यजीवों की लड़ाई आदि शामिल हैं।
साथ चट्टान में बहुत ही सुंदर ढंग से मांडणा का चित्रण किया हुआ है। यहां के चित्र चटक रंगों वाले हैं, जिनमें गेरूए, कत्थई रंगों का प्रयोग किया गया है।