बूंदी. जिला अस्पताल में शनिवार को तीन प्रसूताओं की जान पर बन आई। एक एनेस्थेटिस्ट की गैरमौजूदगी के कारण तीनों महिलाएं 10 घंटे तक कराहती रहीं, बावजूद इसके न तो प्रसव कराया गया और न ही उन्हें मात्र 30 किमी दूर कोटा के लिए रैफर किया गया।
इस दौरान बदहवास परिजन इधर-उधर भागते रहे। हालत ज्यादा बिगड़ते देख ड्यूटी डाक्टरों ने काफी देर बाद उनमें से एक को कोटा रैफर किया। जब इसकी जानकारी पीएमओ डॉ. नवनीत विजय को हुई तो उन्होंने अवकाश पर गए एनेस्थेटिस्ट को वापस बुलाकर देर शाम ऑपरेशन शुरू करवाया।
शनिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे प्रसव पीड़ा होने पर मोहिपुरा की गीता (30), गुरुनानक कॉलोनी उमा (35) समेत तीन गर्भवती महिलाओं ने डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने सामान्य प्रसव से इंकार करते हुए दोपहर को ऑपरेशन कराने की बात कही। लेकिन एनेस्थेटिस्ट के न होने से तीनों का शाम साढ़े छह बजे तक ऑपरेशन नहीं हुआ। इससे प्रसव पीड़ा और तेज हो गई।
वे भूखे-प्यासे 10 घंटे तक तड़पती रहीं। इस दौरान बदहवास परिजनों की सांसें अटक रहीं, वे कभी डॉक्टर के पास दौड़ते तो कभी प्रसूताओं के पास भाग कर आते। एनेस्थेटिस्ट के आने तक इसी तरह उनके पसीने छूटते रहे।
महिलाओं के ऑपरेशन नहीं हो पाने की जानकारी शाम को करीब छह बजे मिली। बाद में दो एनेस्थेटिस्ट को बुलाकर व्यवस्थाएं सुचारू की गईं।
डॉ. नवनीत विजय, पीएमओ सामान्य अस्पताल बूंदी