कोटा। आज से 50 साल पहले लड़कियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल था, तरह-तरह के ताने कसे जाते थे, कुरीतियां सिर चढ़कर बोल रही थीं और महिलाओं की भूमिका घर की चहारदीवारी तक ही सीमित थी, उस दौर में ऐसी भी महिलाएं हुईं, जिन्होंने अपनी बेटियों के लिए परिवार से लेकर समाज तक बगावत की।
उन्हें इस काबिल बना दिया कि आज परिवार से लेकर समाज तक उनपर गर्व कर रहा है। मदर्स डे पर भास्कर ने ऐसी मां को याद किया और उनकी बेटियों से जाना मां के संघर्ष की कहानी।