एग्रो फूड पार्क फेज-2 कॉर्नर के दो प्लाट की आरक्षित दर 4050 और जनरल जोन में 3200 रुपए वर्गमीटर रखी गई है। यह शहर का मुख्य औद्योगिक क्षेत्र है। जहां उद्योग कम और दूसरी गतिविधियां ज्यादा हैं।
मूलभूत सुविधाएं तक नहीं
उद्यमियों का कहना है कि रेडीमेड गारमेंट जोन में चार साल पहले रीको ने 3000 से 3500 रुपए वर्गमीटर में बाद में 5500 रुपए में भूखंड बेचे थे। हालांकि, इन सालों में रीको के अधिकारी वहां पर कोई मूलभूत सुविधाएं नहीं जुटा पाए। न पानी और न बिजली के पोल। जो भूखंड हैं, उन पर भी अतिक्रमण हैं।
रेडीमेड गारमेंट एसोसिएशन अध्यक्ष भी इस मामले में कई बार रीको को भूखंड खाली करोन और पानी, बिजली की सुविधा देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अधिकारी यह कहते रहे कि वह भूखंड की रजिस्ट्री कराएं। भूखंडों के कब्जे दिए बिना उन्होंने रजिस्ट्री कराने से इंकार कर दिया।
उद्योग चलें या नहीं, रीको को मतलब नहीं
लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल का कहना है कि रीको पूरी तरह मुनाफा कमाने वाली संस्था बन चुकी है। उसे इस बात से कोई मतलब नहीं कि उद्योग चले या नहीं चले। रीको के इलेक्ट्रॉनिक पार्क और आईटी पार्क में कोचिंग संस्थान और हॉस्टल बन गए। वहां कोई मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है। उन्होंने बताया कि आठ या नौ करोड़ की जमीन खरीद कर कोई भी लघु उद्यमी उद्योग नहीं लगा सकता। जहां तक रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री की बात करें तो 5 से 10 लाख रुपए में लग सकती है।
' रीको ने इससे पहले 8000 रुपए वर्गमीटर में भूखंड नीलाम किए थे। इसलिए अब इससे कम दर पर तो नीलाम नहीं कर सकते। दर नियमानुसार 10 प्रतिशत बढ़ाई जाती है। कोई भी इंडस्ट्रियल एरिया जो सिटी के बीच आ जाता है, वहां दूसरी गतिविधियां शुरू हो जाती है। इसलिए भूखंडों की कीमत भी बढ़ती है।'
- सीएल गांधीवाल, सीिनयर रीजनल मैनेजर रीको