कोटा। रुद्राक्ष हत्याकांड में ट्रैफिक डीएसपी की भूमिका की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि उन्होंने अंकुर की कार का सत्यापन करने से किसी को नहीं रोका, लेकिन पूरे केस में उनकी ओवरऑल भूमिका सही नहीं रही। एक अफसर की हैसियत से उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया। अपहरण की इस घटना के बाद 9 अक्टूबर की रात जब आईजी-एसपी व पूरी शहर पुलिस सड़क पर थी, तब भी वे घर थीं। जबकि हर अधिकारी को अपने क्षेत्राधिकार में नाकाबंदी व मुस्तैदी बरतने के कड़े निर्देश थे।
पूर्व मंत्री भरत सिंह की शिकायत पर की गई जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। उधर, डीजीपी ने सोमवार रात ही एक आदेश जारी कर उन्हें एपीओ कर दिया। फिलहाल उन्हें पुलिस मुख्यालय, जयपुर में हाजिरी देनी होगी।
जांच में खुली परतें
{जांच में सामने आया कि घटना के बाद पुलिस कंट्रोल रूम ने सभी के लिए एक संदेश प्रसारित किया था, जिसमें सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र में खास मुस्तैदी बरतने और संदिग्ध सफेद निशान माइक्रा कारों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे।
{कंट्रोल रूम के आदेश की पालना में घटना वाली रात ओम एन्क्लेव में अंकुर की कार का सत्यापन करने अनंतपुरा के थानाधिकारी अमर सिंह राठौड़ गए। वहां अंकुर के परिजनों से बातचीत के बाद उन्होंने कोटा शहर पुलिस के वाट्स एप ग्रुप पर कार के दशहरा मेला स्थल पार्किंग में खड़ी होने के बारे में अपडेट किया।
{जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि मेले की पार्किंग ट्रैफिक डीएसपी के ही क्षेत्राधिकार में थीं। वाट्स एप के जरिए यह सूचना उनके ध्यान में भी आ चुकी थी कि वहां एक सफेद निशान माइक्रा खड़ी हुई है, इसके बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
{आरोप यह भी था कि ट्रैफिक डीएसपी ने पुलिस अधिकारी को अंकुर की कार का सत्यापन बाद में करने को कहा, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई। हां, जांच में इतना जरूर स्पष्ट हुआ कि घर पर पुलिस पहुंचने के बाद अंकुर ने मेले से ट्रैफिक डीएसपी को फाेन कर जानकारी ली। खुद अंकुर के बयानों से भी यह बात साबित हुई है।
अब आगे क्या?
सूत्रों ने बताया कि इस शिकायत की जांच कर रहे एएसपी (सिटी) शांतनु ने अपनी रिपोर्ट एसपी को सौंप चुके हैं। एसपी इस रिपोर्ट को आईजी को भेजेंगे। आईजी कार्यालय से यह पुलिस मुख्यालय जाएगी। जहां से डीएसपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू होगी।
'जांच रिपोर्ट मिल चुकी है, लेकिन मैंने अभी देखी नहीं है। रिपोर्ट आईजी कार्यालय काे भेजेंगे। हां, पुलिस महानिदेशक ने ट्रैफिक डीएसपी को एपीओ किया है। इस संबंध में आदेश मिल चुके हैं।' - डॉ. अमनदीप सिंह कपूर, पुलिस अधीक्षक, कोटा (शहर)
'मैं इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहता-नो कमेंट्स। उच्चाधिकारी ही आपको कुछ बता पाएंगे।' - अमर सिंह राठौड़, थानाधिकारी, अनंतपुरा
'मैंने जांच करके रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को दे दी। ये गोपनीय मामले होते हैं। लिहाजा, मैं तो आपको कुछ भी नहीं बता पाऊंगा।' - शांतनु, एएसपी (सिटी)