पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

‘मैंने जयपुर में स्टाफ को 400 रु. में स्वाइन फ्लू का टीका लगवाया, कोटा में 550 रुपए में क्यों’

9 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कोटा. स्वाइन फ्लू की जांच के साथ इस बार मरीजों को टीका भी महंगा खरीदना पड़ रहा है। पिछले साल 900 रुपए में मल्टी डोज (बॉयल) मिल जाता था, जिससे 6 लोगों को टीके लग जाते थे। इस बार फार्मा कंपनियों ने सिंगल डोज बाजार में उतारे हैं और इनकी कीमतों में भी भारी अंतर है।
खुले बाजार में यह जयपुर/कोटा में 500 रुपए से कम में उपलब्ध नहीं है। इससे 6 सदस्यों वाले एक परिवार पर सीधे-सीधे 2 हजार रुपए से ज्यादा का बोझ बढ़ गया है। स्थानीय मंत्री धारीवाल से भास्कर ने इस संबंध में सवाल पूछा तो उन्होंने बताया ‘मैंने जयपुर में अपने स्टाफ को 400 रुपए में ये टीके लगवाए। मुझे कोटा में तो इनके 550 रुपए में मिलने की जानकारी है। यह मामला केबिनेट में उठाऊंगा।’ मंत्री की बात भी मानें तो एक परिवार पर 1500 रुपए का अतिरिक्त भार तो बढ़ा ही है।
कौन लगवाता है टीके
सभी मेडिकल प्रोफेशनल्स, सार्वजनिक स्थानों पर काम करने वाले, ज्यादा टूर करने वाले और भीड़ में रहने वाले लोग यह टीका लगवाते हैं। जागरूकता की वजह से भी अब इस टीके की मांग बढ़ी है और कंपनियां फायदा उठाकर दाम बढ़ा रही हैं।
नए अस्पताल में खुलेगा स्वाइन फ्लू वार्ड
कोटा में स्वाइन फ्लू के पैर पसारने के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आरकेपुरम स्थित नए अस्पताल में स्वाइन फ्लू वार्ड व आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) वार्ड खोलने का निर्णय लिया है। दो-तीन दिन में नया वार्ड शुरू कर दिया जाएगा। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरके आसेरी ने बताया कि नए अस्पताल में 10 बेड का स्वाइन फ्लू वार्ड व 6 बेड का आईसीयू वार्ड खोला जा रहा है। यह वार्ड ग्राउंड फ्लोर पर ही खोले जाएंगे। दोनों वार्डो में सफाई का काम किया जा रहा है। आईसीयू वार्ड के प्रत्येक बेड के लिए वेंटीलेटर व मॉनीटर आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा पहले से उपलब्ध है।
इधर, एक और मौत, आंकड़ा 7 पर पहुंचा, एक पॉजीटिव मिला
कोटात्न स्वाइन फ्लू से मंगलवार तड़के एमबीएस अस्पताल में एक वृद्ध की मौत हो गई। अब तक इस रोग से 7 जनों की मौत हो चुकी है। एक युवक के स्वाइन फ्लू पॉजीटिव मिला है।
एमबीएस के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ.एसआर मीणा ने बताया कि वल्लभबाड़ी निवासी श्यामलाल (89) 3 दिन पूर्व खांसी, जुकाम, बुखार व सांस लेने में परेशानी की शिकायत लेकर आए थे। उन्हें एमबीएस अस्पताल में भर्ती कर स्वाब का नमूना लिया था। मेडिकल कॉलेज की जांच में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव पाया गया। उपचार के दौरान मंगलवार तड़के उनकी मौत हो गई। सीएमएचओ डॉ.गजेंद्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि श्यामलाल मूल रूप से जयपुर के रहने वाले थे।
कुछ दिनों से वल्लभबाड़ी में अपनी पुत्र के यहां रह रहे थे। इसी प्रकार रेलवे पुरानी कॉलोनी निवासी दिनेश कालरा (42) 6 दिन से खांसी, जुकाम, बुखार से पीड़ित था। उसका इलाज चल रहा था। जब हालात में सुधार नहीं हुआ तो डॉ. सुनील दत्त शर्मा ने उन्हें स्वाइन फ्लू की जांच करवाने की सलाह दी। कालरा रविवार को एमबीएस अस्पताल पहुंचे, वहां आउटडोर में परीक्षण करवाकर जांच के लिए स्वाब का नमूना प्रयोगशाला में दिया। मंगलवार तक जब रिपोर्ट नहीं मिली तो कालरा अस्पताल जा पहुंचे। रिपोर्ट में जब स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आया तो वे पुन: डॉक्टर के पास गए, इसके बाद स्वाइन फ्लू का इलाज शुरू किया गया। कालरा का कहना है कि उनकी रिपोर्ट 48 घंटे बाद मिली है।
निशुल्क हो जांच प्रकल्प ने सीएम को भेजा पत्र
निर्धन रोगी उपचार प्रकल्प के संयोजक पंडित अनिल औदिच्य ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व चिकित्सा मंत्री दुरुमियां को पत्र लिखकर स्वाइन फ्लू की जांच निशुल्क किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में स्वाइन फ्लू असर दिखा रहा है। इस खतरनाक जानलेवा बीमारी की जांच सरकार को निशुल्क करनी चाहिए, क्योंकि गरीब 4500-5000 हजार रुपए खर्च कर जांच नहीं करवा सकते। सरकारी अस्पताल में भर्ती होने पर ही निशुल्क जांच की सुविधा मिल रही है, आउटडोर के रोगी को जांच के 1500 रुपए देने पड़ रहे हैं जो आमजन के बूते की बात नहीं हैं। औदिच्य ने कहा कि गरीब रोगी की जांच में प्रकल्प भी सहयोग करेगा।