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1922 से 2015, स्टीम से हाईस्पीड तक का सफर, 200 तक बढ़ सकती है स्पीड

7 वर्ष पहले
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कोटा. रेल बजट में 9 रूटों पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की घोषणा की गई है। इसमें दिल्ली-मुंबई रूट भी शामिल हो सकता है। हालांकि हाड़ौती के जिलों को महानगरों से जोड़ने के लिए नई ट्रेनों की घोषणा नहीं की गई। डकनिया रेलवे स्टेशन के विस्तार को मंजूरी नहीं मिली। भास्कर से बातचीत में डीआरएम अर्चना जोशी ने बताया कि दिल्ली-मुंबई रूट राजधानी रूट यानी मुख्य रूट में गिना जाता है।
हमारे लिए यह अवसर वाली बात है। 160 से 200 की गति से ट्रेनें चलाने वाले रूट में हम भी शामिल हो सकते हैं। अभी इस रूट पर दिल्ली-मुंबई के बीच चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस को अधिकतम 130 किमी प्रतिघंटे की स्पीड से चलाया जा रहा है। छबड़ा स्टेशन पर पर जोन का पहला बायो टायलेट बनाया जा रहा है। इसके अलावा कोटा में डीलक्स टायलेट बनाया जाएगा। इसमें लॉकर की सुविधा भी होगी। कोटा में दो लिफ्ट व दो एक्सेलरेटर भी लगाए जाने हैं। कोटा मंडल के 28 स्टेशनों पर सिगनल सिस्टम में सुधार के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है।
दो साल पहले हुआ था निरीक्षण
दिल्ली-मुंबई रूट पर ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए दो साल पहले जापानी दल ने निरीक्षण किया था। टीम के सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ट्रैक, ब्रिज और प्लेटफॉर्म के शेड में सुधार कर हाईस्पीड ट्रेनों को चलाना संभव है।
इसलिए... कोटा रेल मंडल पर है नाज
> तीन साल पहले मालगाड़ी पर विज्ञापन से आय का कॉन्सेप्ट सबसे पहले कोटा मंडल से ही शुरू हुआ था। इसे अब पूरे देश में लागू किया जा रहा है।
> सफाई के मामले में अन्य बड़े रेलवे स्टेशनों के मुकाबले कोटा मंडल श्रेष्ठ है और कई बार पुरस्कृत हो चुका है।
> कोटा के लोको वर्कशॉप में इंजन का रखरखाव हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहा है। यहां से 1980 से डीजल इंजन जा रहे हैं और 185 इंजन हैं। कोटा से बड़ोदा और अमृतसर तक इंजन जाता है, लेकिन कभी भी फेल नहीं हुआ।
> कोटा में कोच गाइडेंस सिस्टम सबसे पहले लगा।
> कोटा से चारों दिशाओं के अंतिम छोर तक ट्रेन जाती है। पूर्व में जोधपुर, पश्चिम में गुवाहाटी, उत्तर में ऊधमपुर तथा दक्षिण में त्रिवेंद्रम अर्नाकुलम तक ट्रेन की सुविधा है।
> यहां पर दिल्ली-मुंबई मार्ग की लाइनें सबसे पहले 1988 में इलेक्ट्रिसिटी में बदली गई।
> टिकट चेकिंग में सबसे ज्यादा आय 1 करोड़ रुपए कोटा मंडल की हुई।
> सुरक्षा में उत्कृष्ट परिणाम पर लगातार 3 साल से 12 शील्ड प्राप्त करने वाला कोटा मंडल अकेला है। किसी को भी 10 से अधिक शील्ड नहीं मिली।
> वर्ष 1956 में बने कोटा मंडल में मालगाड़ियों की रफ्तार 60 से 100 किलोमीटर प्रतिघंटा है जो अन्य मंडलों से अधिक है।
> ड्राइवर व गार्ड शराब पीकर ड्यूटी करने वालों की चेकिंग के लिए सबसे पहले ब्रीथ एनालाइजर 1990 में कोटा में ही आया। जो भी कर्मचारी पकड़ा गया उसे वॉलेंट्री रिटायरमेंट दे दिया गया।
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