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एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं कोटा में अब भी हवाई

9 वर्ष पहले
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कोटा. आज पेश होने वाले रेल बजट से कोटा को काफी उम्मीदें हैं, लेकिन यूपीए सरकार के पिछले 4 सालों में हाड़ौती के लिए हुई घोषणाएं में से आधी अब तक पूरी नहीं हो पाईं।
2010 के रेल बजट में घोषणा के बावजूद कोटा का स्टेशन वर्ल्ड क्लास नहीं हो सका है। इसके तहत रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए बिजली चालित सीढ़ियां, लिफ्ट, सामान ढोने के लिए ट्रॉली की सुविधा दी जानी थी।
विभिन्न राज्यों से कोटा में कोचिंग करने वाले रेलकर्मियों के बच्चों को रियायती दर पर ठहरने का स्थान उपलब्ध करवाने के लिए वर्ष 2011 के रेल बजट में हॉस्टल बनाए जाने की घोषणा की गई थी। लेकिन, हॉस्टल नहीं बन सका।
एसी कोच के बेडरोल को धोने के काम आने वाली लांड्री मशीन वर्ष 2011 की घोषणा के बाद से अब तक नहीं लगाई जा सकी है। वर्ष 2012 के रेल बजट में कोटा से झालावाड़ के बीच नई ट्रेन चलाने की घोषणा की गई, यह ट्रेन नहीं चलाई जा सकी है। इसी प्रकार कोटा-हनुमानगढ़ ट्रेन को होली-डे से नियमित करने की घोषणा हुई थी, होली-डे को अभी तक एक-एक माह के लिए बढ़ाया जा रहा है।
दिल्ली और जम्मू के लिए मिल सकती है ट्रेन
मंडल के प्रस्ताव माने तो मिलेगा तोहफा
नई ट्रेन: कोटा से दिल्ली, मथुरा और जम्मू जाने के लिए कोटा-जम्मू ट्रेन।
फेरे बढ़ेंगे: संतरागाछी-अजमेर, जोधपुर-पुरी व अजमेर-भागलपुर के।
नई ट्रेनें जो जनता चाहती है
चंडीगढ़, इलाहाबाद, की ओर नई ट्रेन।
कोटा से अजमेर और अलवर के लिए सीधी ट्रेन।
बिहार और उत्तरप्रदेश की तरफ ज्यादा ट्रेनें।
कोटा से उदयपुर के बीच ट्रेन।
कोटा से भोपाल।
अजमेर-हैदराबाद वाया कोटा।
जयपुर-कोयम्बटूर (चेन्नई) के फेरे बढ़ सकते हैं (अभी सप्ताह में तीन दिन चलती है)
ये ट्रेनें सांसद ने मांगी ञ्च उधमपुर-दिल्ली ट्रेन को भी कोटा तक बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि दिल्ली आने के बाद ट्रेन घंटों खड़ी रहती है। इस ट्रेन को कोटा तक बढ़ाने से रैक का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
इलाहाबाद-मथुरा ट्रेन मथुरा में लगभग 12 घंटे खड़ी रहती है। इस ट्रेन को कोटा तक बढ़ाकर यूपी की तरफ जाने वाले यात्रियों को लाभ पहुंचाया जा सकता है।
सालभर में भी नहीं चली झालावाड़ की ट्रेन
रामगंजमंडी-भोपाल 270 किमी की रेल लाइन परियोजना के तहत अभी तक रामगंजमंडी से झालावाड़ तक 26.05 किमी क्षेत्र में रेल लाइन बिछाई गई है। अभी 244 किमी क्षेत्र में ट्रैक का शेष है। 2012 के बजट में इस रूट पर कोटा से झालावाड़ तक नई ट्रेन चलाने की घोषणा भी की गई, लेकिन अब तक ट्रेन नहीं चलाई जा सकी है।
डकनिया से डाढ़देवी तक नई लाइन मांगी
नई लाइन: डकनिया स्टेशन से डाढ़देवी तक लूप लाइन (अतिरिक्त लाइन) डालने का प्रस्ताव। नई लाइन डलने के बाद डकनिया पर और ज्यादा ट्रेनें रूक सकेंगी।
कोच बढ़ेंगे: कोटा से चलने वाली व निकलने वाली ट्रेनों में सामान्य कोच बढ़ाने का प्रस्ताव।
ठहराव: स्वर्णमंदिर मेल का ठहराव डकनिया स्टेशन पर।
जनता: बच्चों को दूध और बीमार को चाहिए दवा
छोटे स्टेशनों पर लाइट, शुद्ध पीने के पानी और शैड लगे हों।
छोटे बच्चों के लिए दूध मिले।
प्लेटफॉर्म पर दवा की दुकान खुलें।
खानपान सामग्री शुद्ध व बेहतर क्वालिटी की मिले।
प्रत्येक कोच में आरपीएफ, जीआरपी जवान तैनात हों।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग से हेल्प लाइन नंबर।
कोचों व प्लेटफॉर्म पर बेहतर सफाई।
खानपान के मीनू में बदलाव हो।
रेलकर्मी: बच्चों को मिले मेडिकल इंस्टीट्यूट
एआईआर एफ ने रेल मंत्री पवन बंसल को रेलकर्मियों व उनके परिवार के हितों को ध्यान में रखते हुए 11 सूत्रीय मांग पत्र दिया है। फेडरेशन के महामंत्री मुकेश गालव व एंपलाइज यूनियन के सहायक महामंत्री एसके.भार्गव ने बताया कि रेलकर्मियों के बच्चों के लिए सेन्ट्रल स्कूल, टेक्निकल इंस्टीट्यूट, मेडिकल इंस्टीट्यूट खोले जाएं।
लार्जेज स्कीम में सभी श्रेणियों को शामिल किया जाए। ट्रेनिंग स्कूलों को आधुनिक किया जाए, रेलवे क्वाटर्स की दशा सुधारी जाए। मांग पत्र में कहा गया है कि रिक्त पदों को भरने का अधिकार डीआरएम व सीडब्ल्यू एम को दिया जाए। डिफेंस व एयरवेज की तरह रेलकर्मियों के माता- पिता (दोनों) का सुविधा पास मिले। स्टाफ बेनीफिट फंड में प्रति रेलकर्मी 800 रुपए किया जाए, अभी 500 रुपए दिए जा रहे हैं।
बिछेगा तो कोटा को नई ट्रेनें भी मिलेंगी ट्रेक
कोटा-बीना 280 किमी क्षेत्र के दोहरीकरण के लिए (डबलिंग) के लिए इस वर्ष के रेल बजट में राशि मिलने की संभावना है। 1400 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में बीते वर्ष रेल बजट में 5 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। इस प्रोजेक्ट का काम रेल विकास निगम करवा रहा है। निगम के डायरेक्टर राजेश मिश्रा ने बताया कि अब तक 14 छोटे-बड़े पुलों के निर्माण का काम शुरू हो चुका है। इसमें तीन बड़े पुल शामिल हैं। जनवरी माह में ही मिट्टी डालने, ट्रैक बिछाने, सिग्नल व इलेक्ट्रिफिकेशन के 700 करोड़ की निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी है। इस वर्ष के बजट में इस प्रोजेक्ट को बड़ी राशि मिलने की उम्मीद है।
बजट की कमी, तो स्पीड भी धीमी
रामगंजमंडी-भोपाल 270 किमी की बड़ी रेल लाइन परियोजना के लिए रेल बजट में 25 करोड़ रुपए से अधिक राशि मिलने की उम्मीद है। बीते वर्ष इस प्रोजेक्ट के साथ धोखा हुआ। रेल बजट में 15 करोड़ रुपए आवंटित किए गए जिसे घटाकर 10 करोड़ फिर 8 करोड़ रुपए कर दिए गए। इससे प्रोजेक्ट धीमी गति से चला। वर्ष 2000-2001 में स्वीकृत 1250 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक केवल 250 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसी कारण प्रोजेक्ट 12 वर्ष बाद भी धीमी गति से ही चल रहा है।
मोबाइल का चार्जर ही नहीं लग पाता
प्लेटफॉर्म पर लगे बिजली के सॉकिट ऐसे हैं कि उनमें मोबाइल के चार्जर ही नहीं लग पाते। लोग चार्जर लेकर परेशान होते रहते हैं। कई ट्रेनें भी ऐसी हैं, जो लंबी दूरी की हैं, लेकिन उनमें भी पूरे कोच में एक ही चार्जर पांइट होता है।