पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंकोटा। तीन महीने पहले डाढ़ देवी के जंगल में वन्यजीव कर्मी को एक नेत्रहीन बंदरिया व उसका नवजात बच्चा मिला था। सुरक्षा की दृष्टि से बंदरिया और उसके बच्चे को चिडिय़ाघर लाया गया। दोनों की सेवा केयरटेकर जानकीलाल कर रहे हैं। पिंजरे में सुबह जानकीलाल इन्हें ककड़ी, केला, मूंगफली खिलाते हैं।
लेकिन कई बार बंदरिया नेत्रहीन होने के नाते इधर-उधर भोजन तलाशने लगती है और उसके हाथ कुछ नहीं लगता। ऐसे में उसका बच्चा खुद अपने हाथ से उसे फल खिलाने लगता है या कभी-कभी उसके हाथ में फल पकड़ा देता है। जानकीलाल ने बताया कि इसीलिए दोनों के पिंजरे नहीं बदले जा रहे हैं। यदि बदल दिया जाए तो एक नई मुसीबत पैदा हो जाएगी।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.