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50 रुपए से शुरू किया कारोबार दे रहा हजारों में आय

9 वर्ष पहले
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कोटा. आर्थिक अभावों में जीवन गुजार रही महिलाओं ने अपने पास से 50-50 रुपए मिलाकर सामूहिक रूप से फूड प्रोसेसिंग का जो काम शुरू किया था, वह आज हजारों रुपए तक पहुंच गया है। इसमें जितना फायदा होता है उसे ये महिलाएं आपस में बांट लेती हैं। कई महिलाओं को पांच हजार से दस हजार रु. तक की हर माह आमदनी हो रही है।
कोटा के सरकारी संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र बोरखेड़ा में पिछले सात साल से महिलाओं को दिए जा रहे निशुल्क प्रशिक्षण का नतीजा है कि कई महिलाएं आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर परिवार में मदद कर रही हैं। इस केंद्र से प्रशिक्षण लेने वाली बोरखेड़ा बस्ती की गायत्रीबाई जो पहले मजदूरी करती थी। उसने 50-50 रुपए प्रतिमाह लेकर दस महिलाओं का ग्रुप बनाकर फूड प्रोसेसिंग का काम शुरू किया जो आज हर माह 5 से दस हजार रुपए तक कमा रही है। जिले में कृषि विज्ञान केंद्र की मॉनीटरिंग में करीब 24 स्वयं सहायता समूह काम कर रहे हैं।
प्रशिक्षित महिलाएं प्रोटीन से भरपूर सोयाबीन का दूध, पनीर, श्रीखंड, गुलाबजामुन, हलुवा, मिश्री मावा, लड्डू और नमकीन बना रही हैं। केंद्र की प्रभारी प्रोफेसर ममता तिवारी ने शक्ति आहार के रूप में न्यूट्रामिल (सोया सत्तू) ईजाद किया था, उसका पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया जा चुका है। इसके साथ ही आंवले का ज्यूस, मुरब्बा, शर्बत, च्यवनप्राश, अचार, कैंडी, जैली, जैम, सुपारी और लड्डू तक बनाए जा रहे हैं। कई महिलाएं व्यक्तिगत स्तर पर भी फूड प्रोसेसिंग का काम कर रही हैं। सोयाबीन हाड़ौती की मुख्य फसल है इसमें बड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है जबकि सेहत के लिए अमृतफल कहे जाने वाले आंवले की भी इस अंचल में खासी पैदावार होती है।
बन गई 400 रुपए रोज की ट्रेनर
शहर के मोखापाड़ा में रहने वाली रमादेवी ने चार साल पूर्व केंद्र से फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण लेने के बाद दस महिलाओं का तेजस्विनी स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। यह समूह सोयाबीन और आंवला आधारित उत्पाद तैयार करता है।
इससे चार से पांच हजार रुपए माह तक की आमदनी हो जाती है। अब वह मास्टर ट्रेनर बनकर कृषि विज्ञान केंद्र में ही महिलाओं को प्रशिक्षण देने का काम भी कर रही है और 400 रुपए रोज कमा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र बोरखेड़ा की प्रभारी प्रो. ममता तिवारी के मुताबिक राजस्थान आजीविका मिशन जयपुर के सहयोग से केंद्र पर साल भर महिलाओं को फूड प्रोसेसिंग समेत अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। अभी 11 फरवरी से 30 मार्च तक फूड प्रोसेसिंग में 20 महिलाओं का तथा लेडीज टेलर फैशन डिजाइनिंग में 20 महिलाओं का ग्रुप 24 मई तक के लिए प्रशिक्षण ले रहा है।