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नेशनल हाइवे पर 23 जंक्शन, 16 संपर्क सड़क 22 किमी काम अधूरा, फिर भी 1 साल से टोल वसूली

4 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी

करीब377 करोड़ की लागत से पीपीपी मोड पर बना नागौर-अजमेर नेशनल हाइवे नंबर 89 विगत दो सालों से आधा अधूरा पड़ा दुर्घटनाएं कारित करने वाला हाइवे बनकर रह गया है। नागौर से अजमेर के लिए कुल 148.25 किमी लंबाई के लिए पीपीपी मोड पर चेन्नई की जीवीआर कंपनी को 2012 में ठेका मिला मगर अफसोस आज भी इस 148 किमी लंबे हाइवे पर 23 जंक्शन, 16 संपर्क सड़कें, छह कस्बों में फोरलेन डिवाइडर निर्माण सहित अजमेर जिले में 22 किमी हाइवे अधूरा पड़ा है।

इस बीच सरकार जीवीआर के मध्य हुए करार के तहत खुद पीडब्ल्यूडी मंत्री ने अधूरे नेशनल हाइवे को पूरा मान मेड़ता में इसका लोकार्पण कर दिया और जीवीआर को इस रूट पर टोल नाके लगाकर टोल वसूलने के अधिकार प्रदान कर दिए। जानकारों की मानें तो इस हाइवे के सुदृढ़ीकरण एवं नवीनीकरण के लिए राज्य के सार्वजनिक निर्माण विभाग की नेशनल हाइवे शाखा ने इस हाइवे निर्माण का कार्य पीपीपी प्रोजेक्ट के जरिए मैसर्स जीवीआर नागौर टोल वे प्राइवेट लिमिटेड को 377 करोड़ रुपए में ठेका दिया था। यह कार्य 31 अक्टूबर 2012 से शुरू होकर 550 दिनों में यानि 31 अप्रैल 2014 को डेढ़ वर्ष की अवधि में पूर्ण होना था मगर यह कार्य आज भी अधूरा पड़ा है जबकि इस बीच 18 मार्च 2016 को प्रशासन सानिवि के अधिकारियों ने इसे पूर्ण मानकर जीवीआर कंपनी को टोल वसूली के अधिकार भी प्रदान कर दिए।

यहांनहीं हो पाया जंक्शन निर्माण

बाडीघाटी से पीह, बाडी घाटी से किला गांव, थांवला से राता ढूंढ़ा, थांवला से भैरूंदा, थांवला से शेखपुरा, टेहला से सूदवाड़, टेहला से बासनी नृसिंह, डोडियाना से चोयलों की ढाणी, पादूकलां से सथाना, डोडियाना से सथाना, पादूकलां से केरिया माकड़ा, पादूकलां से रियांबड़ी, पादूकलां से थाट, पादूकलां से बेड़ास, गवारड़ी, नेतड़िया, एनएच 89 एनएच 458 का जंक्शन, डांगावास बाइपास पर महादेव होटल का बाइपास, डांगावास बाइपास मोररा चौराहा, मोररा चौराहा से मेड़ता का जंक्शन, रेण रोड से मेड़ता का नगर प्रवेश द्वार का जंक्शन, लांछ की ढाणी का जंक्शन, मेघादण्ड, शुभदण्ड, रेण गांव का बाइपास आदि। विगत 18 मार्च 2016 को जीवीआर कंपनी ने उच्चस्तर पर सांठ गांठ कर इस रूट पर टोल वसूली शुरू कर दी मगर एक साल बाद भी अधूरे कार्य पूरे नहीं किए हैं जबकि वह इस हाइवे के निर्माण पर खर्च की गई राशि जितना तो टोल संभवत अब तक वसूल भी चुकी है।

{हाइवे पर छाया-पानी सहित कोई सुविधा नहीं: हाइवेपर छाया-पानी की सुविधाएं नहीं है। इस हाइवे पर जनसुविधा शून्य है। तो बस स्टॉप बने ही ट्रक ले बॉय बन पाए हैं। पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी जीवीआर कंपनी सक्रिय नहीं है।

{अधिकांश मार्गों पर नहीं लगे संकेतक बोर्ड: नेशनलहाइवे के अधूरे रहने के साथ साथ यहां संकेतक बोर्ड लगाने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। अधिकांश मार्गों पर संकेतक बोर्ड नहीं लगे हैं। वाहन चालक भ्रमित हो रहे हैं और उनका वक्त भी जाया हो रहा है।

कमियां यह भी

टोल वसूली मामला कोर्ट पहुंचा

आधेअधूरे हाइवे पर टोल वसूली को अवैध बताकर अभिनव राजस्थान नामक एक संगठन ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और टोल वसूली के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर दी मगर बावजूद इसके अभी तक तो हाइवे का काम पूरा हुआ है और ही टोल वसूली बंद हुई। नतीजतन, इस रूट पर आए दिन हादसे हो रहे हैं मगर सानिवि का नेशनल हाइवे विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। विगत 31 मई 2016 को अभिनव राजस्थान के संयोजक डॉ. अशोक चौधरी ने एक जनहित याचिका यहां मेड़ता की स्थाई लोक अदालत में पेश की थी। जिस पर न्यायालय ने जिला कलेक्टर सानिवि के अधिकारियों को नोटिस भी भेजे। फिलहाल यह याचिका विचाराधीन है।

यहां 16 संपर्क सड़कें अधूरी

नेशनलहाइवे 89 पर नागौर से अजमेर के मध्य 16 संपर्क सड़कें आज भी अधूरी पड़ी है। जानकारों के अनुसार डारा की ढाणी, माइदण्ड कलां, चोलियास, राजोद, खारिया कलां, बांड की ढाणी, पूनास, आकेली, निम्बड़ी चांदावता, कुचेरा से खजवाना की संपर्क सड़क सहित फिरोजपुरा की संपर्क सड़क का अभी भी निर्माण अधर में पड़ा है।

6गांवों में अब तक नहीं बन पाए है फोरलेन डिवाइडर

हादसोंको रोकने के लिए सरकार ने बड़े कस्बों में आबादी के घनत्व को देखते हुए फोरलेन डिवाइडर बनाने की मंजूरी दी थी मगर छह कस्बों में प्रस्तावित फोरलेन डिवाइडर आज भी अधूरे पड़े हैं। जानकारों के अनुसार लाम्पोलाई, झुंझाला, चकढ़ाणी, राजोद, गुढ़ा जगमालोता तथा गवारड़ी में फोरलेन डिवाइडर नहीं बन पाए हैं।

नहींबना आरओबी

नेशनलहाइवे के पीपीपी मोड पर निर्माण के दौरान रेण रेलवे फाटक पर आरओबी भी स्वीकृत हो रखा है मगर उसका निर्माण एक अरसे से खटाई में पड़ा है। यह फाटक 24 घंटे में करीब 60 से 70 बार बंद होती है। इस कारण इस हाइवे पर हर समय जाम के हालात बने रहते हैं।

सरकार कंपनी के बीच में कुछ शर्तों पर एग्रीमेंट हुआ था मगर कंपनी उनके प्रतिनिधि सरकारी शर्तों का बार बार उल्लंघन कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार हाइवे निर्माण पूरा होने पर कम्पलीट सर्टिफिकेट जारी होना था किन्ही परिस्थितियों में ऐसा हो पाए तो प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करना था। यह तभी होना था तब एक स्वतंत्र अभियंता प्रमाणित करें कि कार्य 75 प्रतिशत पूर्ण हो गया है और शेष काम 90 दिन में पूरा होगा मगर सरकार के अधिकारियों कंपनी के अधिकारियों ने सांठ गांठ कर इस शर्त का उल्लंघन किया और मिलीभगत से प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी कर टोल वसूली का अधिकार कंपनी को प्रदान कर दिया। अब यहां विगत 18 मार्च 2016 से लगातार टोल वसूली जारी है मगर अधूरे कार्य संबंधित कंपनी जीवीआर पूरे नहीं करवा रही है।

मोररा चौराहे पर अधूरा जंक्शन से हादसे की आशंका।

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