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दुष्कर्म केस में पूर्व मंत्री नागर बरी

5 वर्ष पहले
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प्रदेश के आधा दर्जन नेता फंसे हैं दुष्कर्म मामलों में

प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक नेताओं पर दुराचार अथवा इससे संबंधित अापराधिक मामले चल रहे हैं या सजा हो चुकी है। कई आईएएस, आईपीएस और आरएएस अफसरों पर भी ऐसे ही मामले चल रहे हैं। कुछ में जांच जारी है तो कुछ में फैसला आना बाकी है।

पूर्वमंत्री महिपाल, कांग्रेस नेता मलखान परसराम : भंवरीदेवी अपहरण, हत्या मामले में पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा, पूर्व कांग्रेसी विधायक मलखान, उनके भाई कांग्रेस नेता परसराम दिसंबर, 2011 से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। कोर्ट में मामले की ट्रायल चल रही है।

पूर्वविधायक उदयलाल आंजना : सितंबर,2013 में नागौर में उदयलाल आंजना के खिलाफ एक महिला से दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। महिला ने वर्ष 1984 से यौन शोषण दुष्कर्म का आरोप लगाया।

विधायककिरोड़ी लाल मीना : डॉ.किरोड़ी सहित 12 लोगों पर विवाहिता ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। जांच जारी है।

मुझे विश्वास था न्याय मिलेगा : नागर

^मुझेशुरू से ही न्यायप्रणाली में विश्वास था, पूरा भरोसा था कि मुझे न्याय मिलेगा। -बाबू लाल नागर, पूर्व मंत्री

मुझे पता था न्याय नहीं मिलेगा, हाईकोर्ट जाऊंगी

^मैंनेन्याय नहीं मिलने की आशंका जताते हुए केस दूसरे कोर्ट में स्थानांतरित करने की एप्लीकेशन लगाई थी। केस स्थानांतरित नहीं किया गया। ऐसे में मुझे पहले से भरोसा हो गया था कि आरोपी बरी होगा। मैं हाईकोर्ट में अपील करूंगी। -पीड़िता

लीगल रिपोर्टर | जयपुर

करीबसाढ़े तीन साल बाद पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर दुष्कर्म मामले में बरी हो गए। सोमवार को जयपुर जिला एवं सेशन न्यायालय संख्या-2 के जज प्रहलाद राय शर्मा ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह अविश्वसनीय है। ऐसे में उसकी गवाही के आधार पर ही अभियोजन का मामला पूरी तरह संदेहजनक हो जाता है। मामले में स्वतंत्र वैज्ञानिक साक्ष्य से आरोपी को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं है। फैसले के अनुसार अभियोजन पक्ष तथाकथित घटना के दिन पीड़िता का आरोपी से मिलना, उसे कमरे में बुलाना, उसके साथ मारपीट करना, जबरन दुष्कर्म करना और घटना के बारे में किसी को नहीं बताने के लिए धमकाना जैसे आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। ट्रायल के दौरान कोर्ट के सामने ऐसे कई तथ्य आए जिन्होंने अभियोजन की पूरी कहानी को ही संदेहास्पद बना दिया। एेसे में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है। शेष| पेज 4

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