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भगवान जानकीनाथ की सवारी निकाली

5 वर्ष पहले
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नगरके प्रमुख नागौरिया मठ मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव कार्यक्रम के तहत भगवान जानकीनाथ की सवारी मंदिर परिसर में विशेष शृंगार के साथ निकाली गई।

मंदिर पीठाधीश्वर विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज ने प्रणय कलह लीला के महत्व को समझाते हुए कहा कि इस लीला के माध्यम से भगवान ने सांसारिक जीवन जीने की प्रेरणा दी है। लीला का वृतांत दृश्य बताते हुए महाराज ने बताया कि भक्त दो भागों में विभाजन होकर एक पक्ष मां लक्ष्मी की ओर हो जाता है तो दूसरा भगवान विष्णु की ओर। जब भगवान विष्णु वैकुंठ में प्रवेश करते हैं तो लक्ष्मी दरवाजा बंद कर लेती है और भगवान से रूठ जाती है। इस लीला को विस्तारपूर्वक बताते हुए मंदिर के मठाधीश ने भक्तों को बताया कि शास्त्र मतों के अनुसार भगवान विष्णु भक्तों की रक्षा के लिए लक्ष्मी को बताए बगैर बैकुण्ठ लोक से रात्रि को चले जाते हैं। प्रात:काल जब भगवान विष्णु क्रीड़ागृह पहुंचते हैं तो देखते हैं कि लक्ष्मीजी ने दरवाजे बंद कर दिए जब आवाज देते हैं तो कोई जवाब नहीं मिलता है। जब भगवान लक्ष्मीजी को आवाज देते हैं तो लक्ष्मीजी कहती है कि कौन, विष्णु कहते हैं मैं माधव तो जवाब मिलता है कि क्या आप बसंत है यहां बसंत का क्या काम है, बगीचे में जाकर पुष्पों के बीच पल्लवित होईये। काफी देर तक दोनों के बीच संवाद चलता है। आखिर लक्ष्मी विष्णु भगवान से कहती है कि आप कहां चले गए। भगवान कहते हैं कि मैं भक्त की रक्षा के लिए चला गया तुम्हे बता नहीं सका। इस प्रकार भगवान विष्णु लक्ष्मी को मनाने में सफल हो जाते हैं।

मकराना|भगवानश्री चारभुजा नाथ के 458 वें प्राकट्योत्सव का रविवार को समारोहपूर्वक समापन हो गया। इस मौके पर चारभुजा मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें शामिल होने के लिए जनसैलाब उमड़ा।

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