सालभर नहीं होता खराब, स्वाद ज्यादा
खींवसरके प्याज का सालभर भंडारण किया जाता है। क्योंकि खराब नहीं होता है। इसका स्वाद गुजरात, महाराष्ट्र को खूब रास रहा है। पिछले साल प्याज की अच्छी आमदनी से इस बार चार गांवों के 150 किसानों ने पहली बार देशी प्याज की रोपाई शुरू की है। प्रति बीघा खेत में प्याज की रोपाई के लिए दो क्यारियों में पौध तैयार की जाती है। फरवरी माह के पहले सप्ताह पौध की रोपाई शुरू की जाती है। रोपाई के बाद प्रत्येक दस दिन में सिंचाई की जाती है। दस सिंचाई के बाद तीन माह में पूर्ण तैयार हो जाता है। पशुओं की देशी खाद- पांच हजार, बीज-1000, स्प्रे- तीन बार के 1000 रुपए, सहित सिंचाई मजदूर खर्च- 28 हजार सहित कुल 35000 रुपए प्रति बीघा खर्चा आता है।
प्रति बीघा तीन लाख रुपए की आमदनी
प्रतिबीघा में करीब 100 से 150 क्विंटल प्याज उत्पादित होता है, जिससे ढ़ाई से तीन लाख तक की पैदावार प्राप्त होती है। तीन बीघा से अधिक क्षेत्र में प्याज उत्पादन करने वाले किसान को कम लागत पर प्याज भण्डारण बनाने के लिए 25 मीट्रिक टन पर 87500 की अनुदान राशि राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत दी जाती है।