गुलाबी ठंड में बिखरा कवि रस
टिमटिमातेसितारों की मध्यम रोशनी के दरम्यिान....... नीले गगन के तले...... साहित्यिक जगत की हस्तियों.... संगीत गायन के कलाकारों...... और वीर तथा हास्य रस के कवियों की कला का संगम जब नागौर की सरजमीं पर हुआ तो जर्रा जर्रा कह उठा.... तारीख वक्त तू ठहर जा यहीं पर। आज मौका है, मुक्तशर(सीमित समय) है.....फिर जाने कब होगा ये मिलन...। दैनिक भास्कर का ऐसा ये कवि सम्मेलन है...। जी हां हम बात कर रहे हैं मंगलवार रात को दैनिक भास्कर की ओर से नागौर में आयोजित कवि सम्मेलन का। इस सम्मेलन में साहित्यिक, गायन कविताओं के कलाकारों का जो फन दिखा उसकी दाद देने के लिए शहर के लोग पूरी रात जमे रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ की गई। नगर परिषद सभापति कृपाराम सोलंकी अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। एसपी गौरव श्रीवास्तव भी बतौर अतिथि मौजूद थे। (पेज 16भी पढ़ें)
1970 के गीतों काे सराहा युवाओं ने
बीकानेरसे आए गीतकार मोहम्म्द इकबाल एम रफीक कादरी ने 1970 के गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। ऐसे में युवाओं ने उन गीतों पर तालियों से उन कलाकारों का हौसला बढ़ाया। गायक मोहम्मद इकबाल ने कार्यक्रम में बैठे लोगों काे आश्चर्य चकित कर दिया। जब उन्होंने महिला-पुरुष दोनों की आवाज में गीत प्रस्तुत किया। मोहम्मद इकबाल ने तेरे हाथों में पहना के चूड़ियां......., फूल तुम्हें भेजा है खत में......, जैसे कई गीतों की प्रस्तुतियां दीं। दूसरे गायक एम रफीक कादरी ने ये शाम मस्तानी......, नरगीसे मस्ताना...., गुलाबी आंखें जो तेरी देखी.......जैसे कई गीतों की प्रस्तुतियां दीं। देर रात तक लोग सुरीले गीत सुनने के लिए बैठे रहे।
दैनिक भास्कर की आेर से आयोजित कवि सम्मेलन में मौजूद श्रोता