आहोर: पहली बार भाजपा की प्रधान
भास्कर न्यूज | आहोर/गुडाबालोतान
वर्ष 1985 से शुरू की गई आहोर पंचायत समिति में वर्ष 1985 से लेकर 2010 तक बनने वाले सभी प्रधान कांग्रेस पार्टी से चुने गए, लेकिन इस बार हुए प्रधान पद के चुनावों में आहोर पंचायत समिति के इतिहास में पहली बार भाजपा की राजेश्वरी कंवर प्रधान बनी हैं।
जानकारी के अनुसार 1985 में सबसे पहले राव भंवरसिंह डोडियाली 1990 में छत्तरसिंह हरजी प्रधान बने। गौरतलब रहे कि 1985 1990 के चुनावों के दौरान पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव की प्रक्र्रिया नहीं होने से आहोर पंचायत समिति में चुने जाने वाले सभी सरपंच वार्ड पंच वोट देकर प्रधान का चुनाव करते थे, लेकिन वर्ष 1995 के दौरान पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई और उस समय छत्तरसिंह हरजी एक बार फिर कांग्रेस से प्रधान बने। इसके बाद वर्ष 2000 में डंूंगाराम मीणा, वर्ष 2005 में भंवरलाल मेघवाल एवं वर्ष 2010 में कांग्रेस की सौरभ कंवर आहोर प्रधान बनी। जबकि इस बार भाजपा से पहली बार राजेश्वरी कंवर प्रधान बनी हैं।
भाजपाका प्रचार करने के कारण याद रहा कमल का निशान: आहोरविधायक शंकरसिंह राजपुरोहित ने बताया कि भाजपा से चुनाव जीतकर आई संजू सैनी ने निर्दलीय के रूप में नामांकन पेश किया था, जबकि भाजपा की ओर से राजेश्वरी कंवर को पहले से ही तय कर लिया गया था। फिर भी संजू सैनी ने पार्टी के विरुद्ध जाकर निर्दलीय के रूप में नामांकन पेश किया, लेकिन इतने दिनों तक भाजपा का प्रचार कर चुनाव जीतने वाली सैनी अपने दिमाग में याद रहे कमल के निशान पर मोहर लगाना नहीं भूली। यह बात उसने खुद आहोर विधायक को बताई।
निर्दलीय ने प्रतिद्वंद्वी को दिया वोट
भाजपासे ही चुनाव जीतकर निर्दलीय के रूप में खड़ी हुई संजू सैनी ने खुद के सिंबल बल्ले पर मोहर नहीं लगाकर अपने सामने पड़े बैलेट पर कमल को देखते ही कमल के निशान पर मोहर लगाकर राजेश्वरी कंवर के पक्ष में मतदान किया। हांलाकि कांग्रेस से चुनकर आए सभी 6 सदस्यों ने निर्दलीय संजू सैनी के पक्ष में मतदान किया। जिस पर भाजपा की ओर से प्रधान की दावेदार राजेश्वरी कंवर को पूरे 17 मत निर्दलीय संजू सैनी का वोट भाजपा में देने से उसके पक्ष में कांग्रेस के मात्र 6 वोट मिले। ऐसे में भाजपा की राजेश्वरी कंवर 11 मतों से जीतकर आहोर प्रधान बनी।