दीक्षा अनुमोदना महोत्सव शुरू
कस्बेमें जैनमुनि चन्द्रयश विजय, वैराग्ययश विजय के नगर प्रवेश के अवसर पर चुंदरीदार साफा पहने पुरूष तथा गीत गाती श्राविकाओं के साथ बैंड की स्वर लहरियों पर युवा नृत्य करते हुए उनके स्वागत में उमड़ पड़े। कुमारी शिखा भैरूलालजी दातेडिया के बैगलोर में अप्रेल मास में होने वाली दीक्षा के अनुमोदनार्थ त्रिदिवसीय महोत्सव के आगाज पर जैनमुनि चन्द्रयश विजय का बैंड बाजों के साथ सौमया पूर्वक प्रवेश हुआ जहां महिलाओं ने अक्षत से वधा कर गहुली की। प्रवेश यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए पुराना बस स्टैंड स्थित त्रिस्तुथिक धर्मशाला पहुंची जहां धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में मुनिवर ने कहा कि दीक्षा का मार्ग आत्म कल्याण का श्रेष्ठ साधन हैं, चरित्र से ही आत्मा में सरलता परोपकार, दया, अंहिसा का भाव प्रकट होता हैं। दीक्षा से कषायों पर विजय प्राप्त करने का प्रशिक्षण मिलता हैं। उन्होंने कहा कि दर्शन ज्ञान एवं चरित्र की आराधना के साथ ही श्रेष्ठ आत्मा को धर्म की विराधना से बचना चाहिए, जिन्हें आने वाले कल की चिंता है वे पैसो के पीछे दौड़तें हैं तथा जिनको आने वाले भव की चिंता हैं वे पैसो को पीछे छोड़ते हैं। इसी के साथ त्रिदिवसीय महोत्सव का प्रारंभ हुआ दोपहर में राजेन्द्र सुरी गुरूपद महापूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान लाभार्थियों ने गुरू मूर्ति की अष्टप्रकारी पूजा कर महाआरती की। रात में कमल एंड पार्टी बेंगलोर ने प्रभु भक्ति में एक से एक बढ़कर गीतों की प्रस्तुति दी।
राजेंद्रभवन का हुआ उद्घाटन
इधर,निकटवर्ती चवरछा गांव में राष्ट्रसंत जैनाचार्य हेमेंद्रसुरीश्वर महाराज के शिष्य रतनमुनिराज चन्द्रयश विजय के सान्निध्य में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ श्री राजेंद्र भवन का उद्घाटन हुआ। त्रिस्तुतिक जैन संघ के तत्वावधान में तथा शाह नथमल मानमल सराफ परिवार की ओर से निर्मित भवन के उद्घाटन समारोह को लेकर सुबह नौ बजे लाभार्थी परिवार की ओर से जैनमुनि चन्द्रयश विजय, मुनि वैराग्यश विजय का गाजे बाजे के साथ सामैया किया गया। वहीं उपस्थित जैन बंधुओं ने संत श्री के जैकारों से गगन गुंजायमान कर दिया। इसके बाद 10 बजे स्नान पूजा पढ़ाई गई तथा मंत्रोच्चार के साथ विधिवत वासक्षेप किया।
सराफ परिवार के पारसमल, बाबूलाल, भैरूलाल ने फीता खीच कर पट्टिका अनावरण कर उद्घाटन किया उद्घाटन के बाद धर्मसभा को संबोधित करते हुए चन्द्रयश विजय ने कहा कि लक्ष्मी का सदपयोग श्रेष्ठ कार्यों में करना चाहिए जैसे मंदिर आश्रम, गौशाला के कार्य में दान करने वाला व्यक्ति अनंत पुण्याई को प्राप्त करता हैं साथ ही परभव में सुख प्राप्त करता हैं। धर्मसभा के अंत में लाभार्थी परिवार ने आभार जताया तथा मुनि ने मांगलिक श्रवण करा आशीर्वाद प्रदान किया