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विद्यालय भवन में कमियों के बावजूद कर दिया एकीकरण
भास्कर न्यूज | गुड़ा बालोतान
निकटवर्तीचांदराई गांव के आम चोहटे पर स्थित राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय में कक्षा कक्षों की कमी होने के बावजूद सरकारी भवन में चल रहे बालिका प्राथमिक विद्यालय को मर्ज किया गया है। ऐसे में विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष नहीं होने के कारण मर्ज किए गए प्राथमिक विद्यालय की बालिकाओं को बरामदे में पढ़ाई कराई जा रही है। वहीं जिस भवन में राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय संचालित हो रहा है वह भवन जैन समाज का निजी भवन है। जैन समाज ने कई वर्षों पूर्व इस भवन को बालिका विद्यालय चलाने के लिए दे दिया था। इस भवन में फिलहाल कुल 7 कमरे ही हैं। जिनमें से एक कक्ष प्रधानाध्यापक के लिए दूसरा पोषाहार के लिए काम में लिया जा रहा है। शेष पांच कमरों में छठी से 10वीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं।
विद्यालयमर्ज करने से नामांकन प्रभावित : मर्जकरने से पहले यह प्राथमिक विद्यालय राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के परिसर में अलग से बने हुए सरकारी भवन में संचालित हो रहा था। इसके बाद प्राथमिक विद्यालय को करीब पौने किमी दूरी पर स्थित राबामावि में मर्ज करने से कक्षा प्रथम से पांचवीं तक की नन्ही छात्राओं को आवाजाही में परेशानी झेलनी पड़ रही थी। जिसके चलते प्राथमिक विद्यालय में नामांकित 42 छात्राओं में से अभी 25 छात्राएं ही विद्यालय रही हैं। जबकि विद्यालय की दूरी के चलते कई छात्राएं विद्यालय छोड़ने के लिए मजबूर है। इधर, जैन समाज के निजी भवन में संचालित हो रहे राबामावि में इस विद्यालय को मर्ज करने के बाद प्राथमिक विद्यालय का सरकारी भवन नाकारा पड़ा है।
इन स्कूलों को रखा था एकीकरण से मुक्त
शिक्षाविभाग की ओर से पिछले दिसंबर माह के दौरान एससी एसटी क्षेत्र के ऐसे विद्यालय जिसका नामांकन 30 का हो, उन्हें यथास्थान संचालित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तो नोडल स्तर के संस्था प्रधानों ने ध्यान दिया और ही ब्लॉक प्रांरभिक शिक्षा अधिकारी ने। इसकी बदौलत विद्यालयों को मर्ज करने के बाद ज्यों का त्यों ही रख दिया गया। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह भी आई कि विद्यालय उसी भवन में तो चलेंगे, लेकिन प्रशासनिक अधिकार संबंधित माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय के संस्था प्रधान के पास रहेंगे। मर्ज हुए विद्यालयों का प्रशासनिक अधिकार माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय के संस्था प्रधान के पास रहने से प्राथमिक उच्च प्राथमिक विद्यालय में पोषाहार पकाने को लेकर भी काफी परेशानी रही है।
शीघ्रही समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।
^चांदराईगांव के राजकीय बालिका विद्यालय को राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय में मर्ज किया गया है। इसके बारे में जानकारी है, लेकिन विद्यालय में कमरों का अभाव है या मर्ज करने के बाद से छात्र छात्राओं के नामांकन में कमी आने के बारे में मौके पर जाकर जांच की जाएगी। फिलहाल शिक्षा विभाग जयपुर की ओर से ऐसे समस्या वाले विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी गई है। शीघ्र ही समस्याओं के समाधान की उम्मीद है। भगवतीप्रसादमनावत, ब्लॉक प्रांरभिक शिक्षा अधिकारी, आहोर
^चांदराईगांव के राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय में राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय को मर्ज किया गया है। विद्यालय भवन में जैन समाज का है तथा इसमें कमरों की भी कमी है। इसलिए कक्षा 6 से 10वीं तक की कक्षाएं कमरों में चल रही हैं, वहीं प्रथम से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए कमरे नहीं होने से इधर-उधर बिठाकर अध्ययन करवाया जा रहा है। इस समस्या के बारे में जिला शिक्षा अधिकारी को भी अवगत करवाया गया है। सुशीलापाली, कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका, राबामावि चांदराई
बालिका प्राथमिक विद्यालय की शिक्षा विभाग ने फिर से मांगी रिपोर्ट
चांदराईगांव के राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय में कुल नामांकन 42 का था। इस विद्यालय में थुंबा मार्ग पर स्थित मेघवाल, मीणा भील कॉलोनी की बालिकाएं अध्ययन करने के लिए आती हैं। सीनियर विद्यालय के परिसर में संचालित हो रहे प्राथमिक विद्यालय में एससी एसटी की कुल 42 छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन इस विद्यालय को पौने किमी दूरी पर स्थित राबामावि में मर्ज कर देने से नामांकन घट कर वर्तमान में 25 का रह गया है। इस बारे में आहोर प्रांरभिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जानकारी लेने पर बताया गया कि पंचायतीराज चुनाव के चलते विद्यालयों के एकीकरण के मामले में कोई हल नहीं निकल पाया था। वर्तमान में शिक्षा विभाग ने समस्या वाले विद्यालयों की फिर से रिपोर्ट मांगी है। शीघ्र ही इस विद्यालय के बारे में भी कोई निर्णय लिया जाएगा।
माध्यमिक विद्यालय में प्राथमिक विद्यालय को मर्ज कर देने से अब कक्षा प्रथम से 10वीं तक की छात्राएं अध्ययन कर रही हैं, लेकिन विद्यालय में कक्षा छठी से दसवीं तक की छात्राओं को बिठाने के लिए ही कमरे उपलब्ध हैं। जबकि कक्षा प्रथम से पांचवीं तक की छात्राओं को या तो बरामदे में बिठाना पड़ता है या फिर नीम के पेड़ के नीचे बिठाकर अध्ययन कराना पड़ रहा है।
गुडा बालोतान. चांदराई गांव में स्थित राबामावि में कक्षा कक्षों के अभाव में बाहर नीम के नीचे बिठाकर अध्ययन करवाती शिक्षिकाएं।