पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • हाथ खोए लेकिन हौसला है बुलंद

हाथ खोए लेकिन हौसला है बुलंद

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भीलवाड़ा . इंसान के मन में यदि जीवन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो राह में कितनी भी बाधाएं आए वह उनको पार कर लेता है। इरादा नेक दृढ़ होने पर सभी समस्या बौनी हो जाती है। कुछ इसी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रही है, शहर के पुलिस लाइन उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली 16 वर्षीय छात्रा अंजु रावत की।
बचपन में थोड़ी सी चूक के कारण उसको जीवन भर का दंश तो मिल गया लेकिन उसकी पढ़ने की ललक ने उम्मीदों की नई रोशनी जगा दी। एक हादसे में दोनों हाथ खोने के बावजूद आज अंजु पैर से कलम पकड़कर जीवन की इबारत लिख रही है। अंजु ने भास्कर को बातचीत में बताया कि वह पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े होना चाहती है ताकि जीवन के सफर में किसी के आगे अपनी लाचारी नहीं जतानी पड़े।

ऐसे हुआ हादसा

मूलतःआसींद तहसील के रतनपुरा ग्राम पंचायत के समेल गांव की सोहन सिंह रावत बादाम देवी की दूसरी पुत्री अंजू नियमित रुप से रतन पुरा स्कूल में अध्ययन कर रही थी। साल 2010 में दीपावली के दस दिन पूर्व वह हंसी खुशी से सहेलियों के साथ गांव के ही पास बकरियां चराने गई। इस दौरान अनायास ही पहाड़ी पर से गुजर रही बिजली की हाई वोल्टेज लाइन के तारों की चपेट में आई गई। वह वही बेहोश होकर गिर पड़ी।
अंजु की सखियों के चिल्लाने पर परिजन दौड़े। तुरंत उसे जिला अस्पताल लाया गया लेकिन क्रिटिकल केस होने से जोधपुर के लिए रैफर कर दिया। वहां डॉक्टरों ने अंजु को बचाने के लिए हाथ काटने पड़े। घटना के एक साल बाद अंजु का परिवार यहां गया। पुलिस लाइन क्षेत्र में किराए के मकान में रहने लगा।

सहेलियां खिलाती है खाना

स्कूल में मिड डे मिल का खाना भी उसकी कक्षा में पढ़ने वाली सहेलियां ही खिलाती है। प्रधानाचार्य तहसीन अली ने बताया कि छात्रा अंजु को भोजन कराने सहित अन्य कार्यों में कक्षा की छात्राएं उसका सहयोग करती है। अंजु ने बताया कि स्कूल में उसका बहुत ध्यान रखा जाता है।

नहीं मिली सहायता

अंजुने बताया कि लगभग छह माह पूर्व वह अपने पिता मोहल्ले वासियों के साथ सहयोग के लिए कलेक्टर के समक्ष पेश हुई। कलेक्टर ने उसे समाज कल्याण विभाग में भिजवा दिया। लेकिन आज तक अंजु को किसी भी प्रकार की सहयोग नहीं मिला।

पढ़ने की है इच्छुक

अंजु ने बताया कि उसे तीन चार किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलकर पढ़ने आना पड़ता है।