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भागवत कथा में बताया गुरु शिष्य का महत्व

7 वर्ष पहले
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शहर के विष्णु धर्मशला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दूसरे दिन कथा वाचक हरिशरण महाराज ने गुरू शिष्य के बीच प्रेम का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मन की शांति ही जीवन का सुख है, अगर आपके मन मे शांति का वास नहीं है तो आप कितने भी धनवान बन जाएं, लेकिन आपके मन को शांति कभी नहीं मिलेगी। हरिशरण महाराज ने भगवत कथा के दूसरे अध्याय का पाठ करते हुए गुरू शिष्य के प्रेम का वर्णन करते हुए कहा एकलव्य और द्रोणाचार्य का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भले ही एकलव्य ने द्रोणाचार्य की मिट्टी की मूर्ति बनाकर धनुर्विद्या सीखी, लेकिन चूंकि उसके मन में गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा का भाव था इसलिए वह इस विद्या में इतना पारगंत हो गया कि स्वयं द्रोणाचार्य भी आश्चर्यचकित रह गए। संत ने कहा की आज द्रोणाचार्य को एकलव्य के कारण जाना जाता है, गुरु का सम्मान हमेशा अपने शिष्य से होता है। इसके बाद कथावाचक संत ने शुकदेव जन्म की कथा सुनाई। कथा में बाल भजन कलाकारों की ओर से आकर्षक भजन प्रस्तुत किए गए। भजनों पर भक्तों ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। देर शाम तक चली कथा आरती के बाद प्रसाद वितरण किया।

आबूरोड. शहरके विष्णु धर्मशाला में भागवत कथा के दौरान प्रवचन देते हरिशरण महाराज तथा मौजूद श्रोता।